ग्वालियर के मामा साहब बांध पर मंडरा रहा संकट

ग्वालियर के मामा साहब बांध पर मंडरा रहा संकट

धरती के लिए पानी को मन कहा जाता है मां की तरह वह धरती पर रहने वाले सभी प्राणियों को जीवन देती है उनका पालन पोषण करती है। और हमारे आने वाले कल को भी बचाता है। लेकिन ग्वालियर के मामा साहब का बांध की खाली पड़ी भूमि पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। बारिश में जब शहर के सभी बंद और तालाब पानी से लबालब हो गए थे तब मामा साहब के बंद को क्यों खाली छोड़ गया उसे भरने का विचार किसी के दिमाग में क्यों नहीं आया । बारिश के समय मामा साहब का बांध भी तो भर नहीं सकता था। रायपुर बांध,वीरपुर बांध और आस पास के जल स्त्रोतों में पानी आया , लेकिन हमारे प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण मामा साहब के बांध का करोड़ो लीटर पानी को रोका नहीं जा सका। बांध का पानी व्यर्थ फैलता रहा है जिसके कारण अब वो समय आ गया। जब बांध पूरी  तरह सुखा पड़ है ,ये दस्तक है आने वाले जल संकट की।अगर अभी भी प्रशासनिक अधिकारियों ने ध्यान नहीं  दिया तो हमें जल संकट से लड़ना पड़ेगा। मामा साहब बांध की  आस पास की जमीन पर  अवैध किए गए  कब्जे अभी तक नहीं हटे है। यह सिर्फ एक बांध की कहानी नहीं बल्कि जल संरक्षण को लेकर प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर है जहां बारिश का पानी सहेजकर भूजल स्तर सुधर जा  सकता था वहां अब भूमाफिया और रसूखदार लोगों ने अवैध खेती शुरू कर दी है। यानी जो पानी शहर के भविष्य के लिए बचाना चाहिए था वह निजी फायदे के लिए उपयोग हो रहा है मदर्स डे पर यह कार्य याद दिलाती है कि अगर हमने धरती मां की कोख में पानी नहीं सजा तो आने वाली पीढ़ियों को प्यास ही विरासत में मिलेगी।

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