ग्लोबल वार्मिंग और उसका प्रकृति पर बढ़ता कहर

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ग्लोबल वार्मिंग और उसका प्रकृति पर बढ़ता कहर

आज के समय में ग्लोबल वार्मिंग पूरी दुनिया में एक चिंता का विषय बन गया है, ग्लोबल वार्मिंग का मतलब होता है कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ना। जिसका मुख्य कारण है, पेड़ का ज्यादा मात्रा में काटना, वायु प्रदूषण बढ़ना, कारखाने से निकलने वाले धुएं और वाहनों से निकलने वाली ज़हरीली गैस। यह मुख्य कारण हैं पर्यावरण के संतुलन को बिगड़ने का और पृथ्वी के तापमान को बढ़ाने का।

ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर समस्या इसलिए भी है , क्योंकि उसका प्रभाव दैनिक जीवन में भी साफ दिखता है। अब ग्लोबल वार्मिंग का असर गर्मियों पर भी साफ दिख रहा है, पहले की तुलना में गरमी का मौसम तेज और बड़ा हो गया है। लोगो को अधिक स्वास्थ सम्बन्धी समस्या भी होने लगी है, जैसे जल्दी थकना, लू लगना और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) होना। गरमी के तेज और लंबे समय तक चलने के कारण लोग ज्यादा कूलर , पंखा और AC इस्तेमाल करते है, जिससे और  प्रदूषित हवाएं निकलती है और बिजली के बिल मैं भी बढ़ोतरी होती है। जिससे लोगों को आर्थिक समस्याओं से गुजरना पड़ता है। कभी–कभी तो गर्मी कितनी भीषण होती है कि जंगलों में आग तक लग जाती है।

बदलाव सिर्फ गर्मियों के मौसम में ही नहीं बारिश में भी देखा गया है, कभी-कभी तो बारिश जरूरत से ज्यादा हो जाती है और कही तो एक बूंद भी नहीं गिरती। जिससे कहीं बाढ़ आ जाती है और बहुत सी जगहों पर अकाल पड़ जाता है। फसलें खराब और बर्बाद हो जाती हैं, जिसके कारण दैनिक जीवन में खाने वाली सब्जियां महंगी हो जाती हैं। जो कि आम लोगों के लिए बहुत बड़ी समस्या है सिर्फ और सिर्फ ग्लोबल वार्मिंग के कारण ।

ऐसा नहीं है कि हम ग्लोबल वार्मिंग को संतुलित नहीं कर सकते है , संतुलित करने के लिए हम खुद से कई कदम उठाने होंगे जैसे– ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना, पानी बचाना और प्रदूषित वाहनों का कम इस्तेमाल करना। हमें अपने साथ–साथ आने  वाली पीढ़ी के भविष्य को भी सुरक्षित करना होगा ।

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