फैशन अब सिर्फ स्टाइल नहीं, पहचान का एक नया रूप बन चुका है:

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फैशन अब सिर्फ स्टाइल नहीं, पहचान का एक नया रूप बन चुका है

आज के समय में फैशन केवल कपड़ों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह अब लोगों की पहचान, रहन-सहन और सोच का हिस्सा बन चुका है। ग्लोबल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया इंफ़्लुएंसर्स ने इंडस्ट्री को काफ़ी तेजी से बढ़ाया है। अब तो फैशन इंडस्ट्री में हर दिन एक नया ट्रेंड देखने को मिलता है। अब फैशन केवल ग्लैमर नहीं बल्कि सोसाइटी, कल्चर और इंडिविजुअलिटी को दर्शाता है।

फैशन इंडस्ट्री लगातार बढ़ोतरी कर रही है। जहाँ पहले ट्रेंड्स सेलिब्रिटीज़ और फ़िल्मों से चुनें जाते थे अब वही इंस्टाग्राम, पिंटरेस्ट और स्ट्रीट स्टाइल कल्चर से फैशन प्रभावित होता है। sustainable fashion, thrift shopping, monochrome styling, oversized clothing और gender-neutral fashion यह सभी ट्रेंड्स युवाओं में काफ़ी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई ट्रेंड आ रहे हैं जिनमें western और ethnic का मिक्स है।

भारत में भी traditional और Western ट्रेंड का सुंदर मेल देखने को मिल रहा है। अब युवाओं को ethnic में modern का टच काफ़ी पसंद आ रहा है। यह ट्रेंड भारत में तेज़ी से फैला है। सोशल मीडिया के ज़रिए फैशन ब्रांड्स तो तेज़ी से आंगे बढ़ ही रहे हैं और अब उनके साथ-साथ लोकल डिज़ाइनर और छोटे बिज़नेसेस भी उभर रहे हैं।

फैशन लोगों को अपनी सोच दिखलाने और इंडिविड्युअलिटी बताने का मौक़ा देता है। जिससे आत्मविश्वास और रचनात्मकता बढ़ती है। फैशन इंडस्ट्री के ज़रिए इन्फ़्लुएंसर्स, डिज़ाइनर, मॉडल्स, फोटोग्राफर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को नई करियर आपर्टूनिटी मिली है। सस्टेनेबल फैशन जैसे ट्रेंड्स पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं।

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आज अगर देखें तो केवल कपड़ों को पहनना नहीं बल्कि अपनी पहचान बनाना हो गया है। अब फैशन कल्चर का हिस्सा बन गया है। यह क्रिएटिविटी लाता है लेकिन इसके नकारात्मक पहलू पर ध्यान देना भी ज़रूरी है। अगर फैशन को अवेयरनेस के रूप में अपनाया जाए, तो यह समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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