आज के इस तेज रफ़्तार और डिजिटल दुनिया के युग में युवा पीढ़ी का जीवन पहले से कई अधिक व्यस्त और तनावपूर्ण हो गया है। युवा पीढ़ी को मानसिक शांति की कढ़ी आवश्यकता है, जो कि सोशल मीडिया,पढ़ाई, करियर और आने वाले समय की चिंता सताई जा रही है। जिसके कारण उनकी मानसिक शांति की तलाश लगातार बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि आज के युवाओं की दिलचस्पी आध्यात्म और मेडिटेशन की ओर बढ़ रही है। माना जाता था कि यह चीज़ें केवल बुज़ुर्गों के लिए हैं लेकिन अब वही चीज़ें युवाओं की जीवनशैली का हिस्सा बन रही हैं।
आज के युवाओं पारंपरिक धार्मिक सोच से अलग अपने तरीकों से आध्यात्म और मेडिटेशन करते हैं। वे केवल धार्मिक अनुष्ठान एयर मंदिरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि योग, मेडिटेशन, माइंडफुलनेस और आत्म-चिंतन जैसी चीज़ों को अपनाकर संतुलन में लाने की कोशिश कर रहे हैं। कई युवाओं का मानना है कि मेडिटेशन उनका तनाव कम करता है और ध्यान केंद्रित रखता है।
सोशल मीडिया ने भी इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक आदि इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर योग आसन और सरल तरीके से योग और मेडिटेशन करना सिखाया गया है, जो कि चीज़ों को आसान कर देता है। आज के युवा अब आध्यात्म को पुराने विचार नहीं बल्कि सेल्फ-केयर के रूप में अपना रहे हैं। उन्हें समझ आ रहा है कि वही शुद्ध जीवनशैली का हिस्सा है। कई लोग सुबह की शुरुवात ध्यान, मंत्र और पॉजिटिव शॉट्स से करते हैं।
हाल के कुछ वर्षों में “भजन क्लबिंग”, “स्पिरिचुअल टावेल” और “मेडिटेशन रिट्रीट” जैसे ट्रेंड्स युवाओं के बीच तेज़ी से बढ़ते हुए नज़र आ रहे हैं। अब युवा केवल घर बैठे सोशल मीडिया के ज़रिए ही नहीं बल्कि समक्ष जाकर उन चीज़ों को अपनाना चाहते हैं। युवा अब मानसिक शांति और आत्म-संतुलन की तलाश भी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद अकेलेपन, डिजिटल थकान और भविष्य की अनिश्चितता ने युवाओं को मानसिक रूप से काफ़ी प्रभावित किया है और अब उन्हें भी समझ आ गया है कि मेडिटेशन और आध्यात्म मन की शांति और शरीर के लिए फ़ायदेमंद हैं। आज कल सोशल मीडिया पर हर ट्रेंड सही नहीं होता कुछ शरीर को नुकसान भी पहुँचा सकते हैं। इसीलिए मेडिटेशन और आध्यात्म को ट्रेंड समझकर नहीं, बल्कि आत्म-विकास और बेहतर जीवन के लिए अपनाएं।