ग्वालियर में आज़ाद समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता दामोदर यादव ने एक बार फिर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बातचीत में यादव ने आरोप लगाया कि शिवपुरी में हुई कथा के दौरान शास्त्री ने मुस्लिम महिलाओं पर अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी की, जो न केवल समाज को बांटने वाली है बल्कि संत परंपरा के भी खिलाफ है।
यादव के अनुसार, शास्त्री ने अपने प्रवचन में कथित तौर पर कहा कि “मुस्लिम महिलाएं 30-30 बच्चे पैदा करती हैं” और “अगर मांग खाली है तो समझो प्लॉट खाली है” जैसी भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने इसे धर्म के नाम पर की जा रही भड़काऊ बयानबाज़ी बताते हुए कहा कि ऐसे शब्द किसी धार्मिक कथावाचक को शोभा नहीं देते और समाज में जहर घोलने का काम करते हैं। यादव ने मांग की कि धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, क्योंकि यह टिप्पणियां न केवल महिलाओं का अपमान करती हैं बल्कि समुदायों के बीच तनाव भी बढ़ाती हैं।
गुरु रामभद्राचार्य को भी घेरा
दामोदर यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के गुरु जगतगुरु रामभद्राचार्य पर भी सीधा हमला बोला और उन्हें “अक्ल का अंधा” कहा। यादव ने आरोप लगाया कि यदि गुरु–शिष्य दोनों एक जैसी मानसिकता रखते हैं तो यह समाज के लिए खतरनाक संकेत है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मंचों का उपयोग किसी भी समुदाय या महिला पर टिप्पणी करने के लिए नहीं होना चाहिए। यह देश की सद्भावना और धार्मिक आस्था दोनों को चोट पहुंचाता है।
हिंदू एकता यात्रा को लेकर सख्त चेतावनी
धीरेंद्र शास्त्री द्वारा प्रस्तावित “दूसरी हिंदू एकता यात्रा” को लेकर भी यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछली बार वे कोर्ट जाने में देर कर गए थे, लेकिन इस बार समय रहते कानूनी कदम उठाकर यात्रा रोकने की कोशिश करेंगे। यादव के अनुसार, यह यात्रा राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ाने और सांप्रदायिक तनाव भड़काने का प्रयास है।
6 दिसंबर को दतिया में बड़ी रैली का ऐलान
दामोदर यादव ने बताया कि 6 दिसंबर को आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर रावण के नेतृत्व में दतिया जिले के इंदरगढ़ में एक विशाल आमसभा आयोजित की जा रही है। यह रैली सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की रक्षा के उद्देश्यों को लेकर आयोजित की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में भीड़ जुटने की उम्मीद है। उन्होंने दावा किया कि यह सभा सरकार और समाज दोनों को यह संदेश देगी कि संविधान और सामाजिक भाईचारा सर्वोपरि है, और किसी भी प्रकार की भड़काऊ राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।