पुलिस शहीद स्मृति दिवस के अवसर पर मंगलवार को 14वीं वाहिनी विसबल मैदान में एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर पुलिस अधिकारियों, जवानों और शहीद परिजनों ने उन वीर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी।
कार्यक्रम में आईजी अरविंद सक्सेना, डीआईजी अमित सांघी, और एसएसपी धर्मवीर सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस अवसर पर शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारजनों को सम्मानित किया गया और उनके बलिदान को नमन किया गया।
क्यों मनाया जाता है पुलिस शहीद स्मृति दिवस?
यह दिवस हर वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। वर्ष 1959 में इसी दिन लद्दाख के दुर्गम “हॉट स्प्रिंग” क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा पर चीन की सेना के साथ हुई मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 10 जवानों ने देश की रक्षा करते हुए वीरगति पाई थी। तब से यह दिन पुलिस बलों द्वारा शौर्य और बलिदान की याद में मनाया जाता है।
अब तक 35,492 पुलिसकर्मी हुए शहीद
पुलिस विभाग के अनुसार, 21 अक्टूबर 1959 से 31 अगस्त 2025 तक देशभर में 35,492 पुलिस अधिकारी और जवान कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हो चुके हैं। पिछले एक वर्ष (1 सितंबर 2024 से 31 अगस्त 2025) के दौरान 191 पुलिस अधिकारी-जवानों ने देश सेवा में प्राणों की आहुति दी। इनमें से मध्य प्रदेश के 11 बहादुर जवान भी शामिल हैं।
मध्य प्रदेश के इन 11 जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
इस वर्ष एमपी के जिन वीर पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य की राह पर प्राणों का बलिदान दिया, उनके नाम हैं —
- निरीक्षक संजय पाठक
- निरीक्षक रमेश धुर्वे
- सहायक उपनिरीक्षक रामचरण गौतम
- सहायक उपनिरीक्षक महेश कुमार कोरी
- प्रधान आरक्षक संतोष कुशवाह
- प्रधान आरक्षक प्रिंस गर्ग
- प्रधान आरक्षक अभिषेक शिंदे
- प्रधान आरक्षक गोविंद पटेल
- आरक्षक अनुज सिंह
- आरक्षक सुंदर सिंह बघेल
- आरक्षक अनिल यादव
इन सभी ने कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राणों को देशहित में समर्पित किया।
श्रद्धांजलि सभा और परेड में उमड़ा सम्मान का भाव
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद स्मारक पर शहीद दिवस परेड से हुई, जिसका नेतृत्व उप सेनानी संजय कौल ने किया। इस अवसर पर आईजी अरविंद कुमार सक्सेना, डीआईजी अमित सांघी, कलेक्टर रुचिका चौहान, सेनानी राकेश कुमार सगर, और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त अधिकारी उपस्थित रहे।
आईजी बोले — “शहीदों का बलिदान कभी नहीं भुलाया जा सकता”
मुख्य अतिथि आईजी अरविंद सक्सेना ने कहा कि देशभर में कठिन परिस्थितियों में सेवा देने वाले पुलिसकर्मी राष्ट्र के सच्चे प्रहरी हैं। उन्होंने कहा, “शहीदों का बलिदान कभी नहीं भुलाया जा सकता। उनका साहस और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।”
इस दौरान बीते वर्ष में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के नामों का वाचन संजय कौल, उप सेनानी 14वीं वाहिनी विसबल ग्वालियर द्वारा किया गया। परेड कमांडर दिलीप चंद छारी और सहायक परेड कमांडर नरेंद्र सिंह कुशवाह थे।
सम्मान में झुका ग्वालियर, गूंजा “अमर रहे” का नारा
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। “अमर रहे, अमर रहे” के नारों के बीच ग्वालियर पुलिस बल ने अपने शहीद साथियों को नमन किया।