त्योहारों की परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं से भरे भारत में हर जगह कुछ न कुछ अनोखा देखने को मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जहां नरक चतुर्दशी (नरक चौदस) के दिन यमराज का महा अभिषेक किया जाता है? यह अनोखी परंपरा मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आज भी जीवित है।
ग्वालियर का यह मंदिर प्रदेश का एकमात्र यमराज मंदिर है, जहां हर साल नरक चौदस के अवसर पर श्रद्धालु यमराज की विशेष पूजा और अभिषेक करते हैं। इस परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं।
ढाई सौ साल पुराना मंदिर, सिंधिया राजघराने से जुड़ा इतिहास
मंदिर के महंत आचार्य महेश शर्मा के अनुसार, यह मंदिर लगभग 250 से 300 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना सिंधिया राजघराने द्वारा कराई गई थी। आचार्य शर्मा बताते हैं कि “अब हमारी सातवीं पीढ़ी इस मंदिर की सेवा और देखरेख कर रही है।”
नरक चौदस पर यमराज का महा अभिषेक क्यों किया जाता है?
आचार्य शर्मा ने बताया कि इस परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो मार्कंडेय ऋषि और भगवान शिव से संबंधित है। कथा के अनुसार, मार्कंडेय ऋषि को भगवान शिव के आशीर्वाद से मात्र 12 वर्ष की उम्र का वरदान प्राप्त हुआ था। जब उनकी आयु पूर्ण होने का समय आया, तो यमराज के दूत उन्हें लेने पहुंचे। लेकिन उस समय मार्कंडेय ऋषि गहन तपस्या में लीन थे।
शिवभक्ति से प्रभावित होकर यमदूत उन्हें नहीं ले जा सके और लौट गए। तब स्वयं यमराज उन्हें लेने आए। उन्होंने जब ब्रह्मा फांस (पाश) फेंकी, तो मार्कंडेय ऋषि ने भयभीत होकर शिवलिंग को आलिंगन कर लिया। उसी क्षण भगवान शिव लिंग से प्रकट हुए और यमराज को परास्त कर मार्कंडेय ऋषि को अमरता का वरदान दिया। इसी प्रसंग की याद में हर साल नरक चतुर्दशी के दिन यमराज का अभिषेक और पूजन किया जाता है। इसे “धर्म और जीवन की रक्षा का पर्व” भी माना जाता है।
भक्तों की आस्था और धार्मिक माहौल
नरक चौदस के दिन सुबह से ही भक्त मंदिर पहुंचकर यमराज के दर्शन करते हैं। दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से यमराज का महा अभिषेक किया जाता है। इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना और आरती होती है। माना जाता है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है और घर में शांति व समृद्धि आती है।
ग्वालियर की धार्मिक धरोहर का प्रतीक
ग्वालियर का यह यमराज मंदिर न केवल श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह प्रदेश की धार्मिक विविधता और आस्था की गहराई को भी दर्शाता है। जहां बाकी देश में नरक चौदस दीपावली की तैयारी का दिन माना जाता है, वहीं ग्वालियर में यह दिन यमराज की आराधना और धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता है।