श्रीधर पराड़कर द्वारा रचित पुस्तक ‘‘तत्वमसि” का विमोचन। 

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श्रीधर पराड़कर द्वारा रचित पुस्तक ‘‘तत्वमसि” का विमोचन। 

ग्वालियर। शाहर के विख्यात वरिष्ट साहित्यकार व अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संगठन मंत्री श्रीधर पराडकर द्वारा रचित नवीन कृति ‘‘तत्वमसि‘‘ पुस्तक का विमोचन समारोह सोमवार को राजमाता विजया राजे सिंधिया एवं कृषि विश्वविद्यालय एवं मध्य भारती हिंदी साहित्य सभा ग्वालियर (अखिल भारतीय साहित्य पर सबसे सम्बद्ध) के तत्वावधान राजमाता विजया राजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुआ।

समारोह का प्रारंभ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पण व दीप प्रज्जवलित कर किया गया। सरस्वती वंदना के पश्चात परिषद गीत डॉक्टर करुणा सक्सेना ने प्रस्तुत किया। सभी अतिथियों का परिचय साहित्य सभा के उपाध्यक्ष दिनेश पाठक ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ कुमार संजीव, दिनेश पाठक, डॉ पद्मा शर्मा, सक्सेना राम चरण रुचिर, डॉ लोकेश तिवारी , डॉ पदमा शर्मा, उपेंद्र कस्तूरी एवं धीरज शर्मा आदि ने शाल, श्रीफल भेंटकर किया। 

श्रीधर पराड़कर की पुस्तक तत्वमसि का लोकार्पण हमारे लिए बहुत ही गर्व का विषय है। आज की पीढ़ी जो संस्कारों से भटक रही है, सस्कारों के भटकाव से हाने वाले परिणाम का हम कैसे सामना कर सकते है। इस प्रकार की पुस्तक में सभी बिन्दुओं को स्पर्श किया गया है। यह बात मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यावाह अरूण कुमार ने पुस्तक विमोचम समारोह के दौरान कही। 

विमोचन समारोह की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि श्रीधर द्वारा रचित ‘तत्वमसि‘ पुस्तक उनके  प्रचारक के रूप में जीवन के विभिन्न पहलुओं पर खुला चित्रण एवं स्वयंसेवकों एवं ऋषि तुल्य जीवन पर व्यतीत करते हुए पुस्तक का लेखन किया है। कार्यक्रम में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालयर भोपाल के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि हमें समर्पित भाव से राष्ट्र निर्माण में कार्य करना चाहिए, संघ प्रचारक के रूप में श्रीधर जी यह पुस्तक बहुत उल्लेखनीय एवं मार्गदर्शन का कार्य करने में सक्षम है। इसी क्रम में राजमाता विजयराजे सिंधिया कृशि विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. अरविंद शुक्ला ने कहा कि पुस्तक में उल्लेखित हर विषय एक वट वृक्ष के बीज की महिमा का प्रतीक है।

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तत्वमसि के रचनाकार श्रीधर पराडकर ने अपने उद्वबोधन में कहा कि जीवन का शाश्वत रूप कथा रूप में आना चाहिए स्वयं सेवक की कथा काम एवं जीवन का वृतांत उपन्यासित रूप में इस पुस्तक में समाहित किया है। अतिथि उद्धबोधन के पश्चात् मौजूद गणमान्यजनों का आभार प्रदर्शन सभा के अध्यक्ष डॉ कुमार संजीव ने किया। इस अवसर पर अभा साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ सुशील चन्द्र त्रिवेदी, दिनेश पाठक, डॉ पदम शर्मा, उपेन्द्र कस्तूरी एवं धीरज शर्मा, जगदीश तोमर, अनंगपाल सिह भदौरिया, डाॅ. केशव पाण्डेय, अशोक पाठक, कृष्णकांत शर्मा, अनेक स्वयं सेवक व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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