लोकसभा के अंदर महिला आरक्षण कानून से जुड़े 3 संशोधित बिल पेश किए गए। जिसके साथ विपक्ष का भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, कांग्रेस के सांसद कैसी वेणुगोपाल ने सबसे पहले इन बिलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान को हाईजैक करना चाहती है, जिसके बात सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी विरोध किया। वे बोले, जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा, तब तक इसका मतलब नहीं है। यह सुनकर अमित शाह बोले– मुसलमानों को धर्म के आधार पर आरक्षण देना गैर संवैधानिक है, इसका तो सवाल ही पैदा नहीं होता। इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा– पूरे देश की आधी आबादी आरक्षण चाहती है। मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या है? इस पर अमित शाह जवाब देते हुए बोले समाजवादी पार्टी पूरे टिकट मुस्लिम महिलाओं को दें दें, हमें कहा आपत्ति है। इस संशोधन बिल के अंदर लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है, फिलहाल मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। अब सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए सीमांकन भी किया जाएगा, इसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
2023 के बने हुए बिल में 30 महीने बाद बदलाव क्यों
केंद्र सरकार द्वारा 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम ‘ संसद में प्रस्तावित किया था। इसके बाद यह लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित हो गया जिसके बाद राष्ट्रपति ने इसको मंजूरी दी। पुराने कानून में ऐसा क्या था जो सरकार को अब बदलना पड़ा 2027 की जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी था, इसी वजह से यह कानून 2034 तक स्थगित हो सकता था। मौजूदा परिस्थिति में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने का निर्णय लिया गया है जिससे यह कानून 2029 के लोकसभा चुनाव तक लागू होकर चुनावी फायदा पहुंचाए। इस बदलाव से 2029 लोकसभा और ओडिशा, आंध्रप्रदेश, सिक्किम, और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो जाएगा।