भारतीय परंपराओं को पिछड़ा हुआ कहने वाले पश्चिमी अब उसी को अपना रहे हैं। कभी भारतीय खान-पान और पहनावे को “पुराना” या “बैकवर्ड” कहकर अनदेखा किया जाता था लेकिन आज वही ऑस्कर के मंच पर “हाई फैशन” कहकर बिक रहा है। चाहे वो Michael B. Jordan द्वारा पहनी हुई “जोधपुरी” प्रेरित सिल्हूट ही क्यों ना हो। वहीं “टर्मरिक लाटे” का विदेशी कैफे में पौष्टिक आधार के रूप में अपनाया जा रहा है।
फैशन में देसी ठप्पा
आज पश्चिमी डिजाइनर्स और वहाँ के मशहूर हस्ती भारतीय पहनावे को अपना रहे हैं। जोधपुरी सूट, साड़ी, कोल्हापुरी चप्पल- ये सब अब पूरे देश भर में फैशन बन चुका है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जो चीज़ें हमारे भारत में हमेशा से मौजूद थी, जो चीज़ें हम हमेशा से अपना रहे थे आज वही चीज़ पश्चिमी अपना रहे हैं तो “ट्रेंड” कहलाता है। आख़िर कार क्यों?
प्राचीन ख़ान-पान का वैश्विक रूप
भारत के घरेलू नुस्खे और मसाले अब देशभर में “सुपरफूड” के रूप में रौशन हैं। “Turmeric latte” यानी कि “हल्दी वाला दूध” जो कि हमारी दादी के पुराने नुस्खे हुआ करते थे। अब वही विदेश में कई कैफ़े में महँगे बिक रहे हैं। इन सभी को भारत में सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है और अब विदेशी उसे भी नए नाम देकर कैफ़े में बेच रहे हैं।
सांस्कृतिक परिवर्तन
पहले भारतीयों के पहनावे का मज़ाक उड़ाते और अब उसी को अपनाते हैं। विदेशी पहने को “कूल” और “ट्रेंड” कहा जाता है। यह एक तरह का सांस्कृतिक बदलाव ही तो हौ।
भारतीय संस्कृति अपनी अत्यंत प्राचीन रही है। और जब आप विदेशी इसे अपना रहे हैं तो यह हमारे लिए गर्व की बात है। यह विभिन्न धर्मों, भाषाओं, पहनावों, ख़ान-पान का एक अनूठा संगम है। लेकिन साथ ही इसे पूरा सम्मान भी मिलना चाहिए। जैसी यह हमारी परंपरा है वैसे ही इसे जाना जाये।