खामोश होता आसमान: नेटवर्क के जाल में फंसते परिंदे

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खामोश होता आसमान: नेटवर्क के जाल में फंसते परिंदे

इस निरंतर बदलते दौर में और बढ़ते हुए शहरीकरण से हम मनुष्यों का जीवन काफ़ी सरल और आरामदायक हो गया है। लेकिन इस बढ़ती आबादी और टेक्नोलॉजी के कारण पक्षियों का जीवन काफ़ी प्रभावित हो रहा है क्योंकि, इन (high tension lines) उच्च तनाव तारों और तेज गति वाले मोबाइल फ़ोन नेटवर्क टावर के कारण निर्दोष पक्षी अपनी जान गवा रहे है और पर्यावरण से विलुप्त होते जा रहे है। इसके पीछे बहुत सारे कारण छुपे हुए है जैसे की कुछ रिपोर्ट्स और टेस्ट की माने तो इन मोबाइल फ़ोन टावर से कुछ तरंगें (रेडिएशन) निकलती है जिससे पक्षी अपने घर लौटने की क्षमता और दिशाओं को पहचानने की शक्ति को गवा देते है और कभी अपने घोसले में नहीं लोट पाते और कई बार ऐसे ही वह भटकते हुए मर जाते है।

वह बिजली के तार इतने पतले होते है की तेज उड़ान की वजह से पक्षी उनमें उलझ जाते है और उनकी गर्दन एवं पंख तारों में फस जाते है अथवा करंट सप्लाई के कारण उनकी मोके पर ही मृत्यु हो जाती है। लेकिन सबसे बड़ी वजह उनकी मृत्यु की उन टावर से निकलने वाली तरंगें होती है जो सीधा उनके दिल पर प्रभाव डालती है जिससे उनकी धड़कन बढ़ती है और शरीर में तनाव महसूस होता है उन तरंगों की वजह से मासूम पक्षियों में कमज़ोरी और मौत का ख़तरा बढ़ जाता है।

कम पेड़ होने की वजह से पक्षी बिजली के तारों पर बैठते है और करंट का खतरा भी बढ़ता है और अगर कुछ रिपोर्ट्स की माने तो मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें पक्षियों के घोसलों में पनप रहे अंडों पर भी प्रभाव डालती है। जिससे उन अंडों में बन रहे चूज़े सही से विकसित नहीं हो पाते और वह अंडे ख़राब हो जाते है और उनमें पनप रहे चूज़े भी मर जाते है। इन्हीं रेडिएशन की वजह से पक्षी तनाव महसूस करते है और ठीक से आहार नहीं ले पाते जिससे उनके स्वास्थ पर भी गंभीर असर आता है और वह कमज़ोरी और बीमारियों का रूप ले लेती है। अगर जल्द ही इस समस्या पर हमने ध्यान नहीं दिया तो प्रकृति से पक्षियों की प्रजाति विलुप्त हो जाएगी।

‘जिससे पर्यावरण पर भी काफ़ी प्रभाव पड़ेगा क्योंकि पक्षी सिर्फ़ आकाश में उड़ने वाले जीव नहीं बल्कि ये पृथ्वी के प्राकर्तिक वातावरण को संतुलित रखने में अपना बहुत बड़ा योगदान भी देते है जैसे की परागरण (पॉलिनेशन) जिसमें पक्षियों के द्वारा फूलों के पौधे लग पाते है अगर पक्षी विलुप्त हुए तो शायद ये फूलो के पौधे भी गायब हो जायेंगे और इनके ना होने का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा क्योंकि चिड़ियों का भोजन छोटे-मोटे कीड़े मकोड़े होते है, अगर उनको पक्षी नहीं  खायेंगे तो उन कीड़ो की संख्या बड़ती जाएगी और फिर वह कीड़े फसलों को नुक़सान पहुंचाएंगे। जिससे किसान और कृषि क्षेत्र पर गहरा असर होगा, इसके साथ-साथ कुछ पक्षियों की प्रजाति मरे हुए जीव जंतु भी खाती है अगर वह नहीं होंगे तो ये जीवों के शव से सड़न और बदबू फैलेगी जिससे कई घातक बीमारियां जन्म लेंगी।

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सुरक्षा पर कैसे दें ध्यान

इसलिए हमें इनकी सुरक्षा पर ध्यान देना होगा और इनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ पौधे लगाना चाहिए। जिससे उनके बैठने के लिए और घोसला बनाने के लिए स्थान की कमी ना पड़े और वह प्रकृति से क़रीब रह पाए, इन टावर को जंगलों और नदियों से दूर लगाना क्योंकि ज्यादातर पक्षी यही खुलकर उड़ते है। शहरों में उनके लिए अपनी छत पर पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था रखे जिससे शहरों में भी वह अपना जीवन जी पाए। हम मनुष्यों को इन बढ़ती हुई तकनीक और संसाधनों के बीच ये याद रखना बहुत जरूरी है की पक्षी केवल आसमान का हिस्सा नहीं पूरे पर्यावरण का

महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए हमें इनकी सुरक्षा करने की ज़्यादा से ज़्यादा कोशिश करनी चाहिए। हमें उनको नियमित रूप से दाना डालना चाहिए और मिट्टी के बर्तनों में उनके लिए शीतल जल की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि हम उनका जीवन थोड़ा सरल बनाने मे अपना योगदान दे सकें।

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