आज के दौर में लोगों ने एक दूसरे से बात करना, एक दूसरे से मिलना जुलना, या घूमना फिरना बहुत ही कम कर दिया है और यही कमी बन चुकी है फायदा उन लोगों कम्पनियों और ऐप डेवलपर्स के लिए जो लोगों के इसी कमी का बिजनेस करने मै लगे हुए है।
बाजार में ऐसे कई ऐप आ चुके है जो लोगों को वर्चुअल गर्लफ्रेंड और वर्चुअल ब्वॉयफ्रेंड मुहैया करवा रहे है और इस दौड़ में सबसे आगे है एआई से निर्मित एप्लीकेशन जिसमें हर व्यक्ति अपनी मन और पसंदीदा किरदार चुन रहा है या बना रहा है।
यह ऐप लोगों की इस अकेलेपन की कमजोरी का भरपूर फायदा उठाकर एक मोटी कमाई कर रहा है। डेटिंग के इस वर्चुअल दुनिया में यह ऐप अपने यूजर को हर वो संभव चीज का अनुभव करवाने की कोशिश करते है जो इंसान अपने रिश्तों में टेलीफोन संचार के माध्यम से अनुभव करता है। एआई से आधारित ये ऐप वर्चुअल पार्टनर को डेटिंग पार्टनर को रोमांस की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
एआई ऐप की खासियत
यह ऐप न केवल किसी व्यक्ति का वर्चुअल पार्टनर बनता है बल्कि उसके मूड और जरूरत के अनुसार खुद को डालता है और यूजर को एक आदर्श गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड का अनुभव भी देता है। अमूमन इंसान के वास्तविक रिश्तों में उसकी विभिन्न जटिलताओं का सामना करना पड़ता है जैसे वाद–विवाद, चीज़ें नापसंद होना, चिढ़ जाना, आलोचना करना और अन्य भी, लेकिन एआई से निर्मित यह ऐप वर्चुअल डेट में इन सारी जटिलताओं का समाधान कर उनको दूर कर देता है और अपने वर्चुअल पार्टनर को एक आनंदमय माहौल उपलब्ध करवाता है।
इंसानों से भी 50% प्रतिशत ज्यादा चापलूस है एआई – रिसर्च
साइंस पत्रिका मैं प्रकाशित एक शोध पत्र में 11 प्रमुख लैंग्वेज मॉडल में सामाजिक चाटुकारिता के माप की गई है। इस मॉडल में इंसानों की तुलना में तकरीबन 50 प्रतिशत ज्यादा चाटुकारिता दिखाई दी। जिसमें किसी भी वर्चुअल डेट के दौरान मानवीय अनैतिकताओं, अवैध या हानिकारक व्यवहार से जुड़ी गलत बातों का भी समर्थन किया।
जेम्स मुल्डून के मुताबिक फ्रेंड एंड प्रतिद्वंदी कहलाने वाले ये ऐप 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। अकेलेपन और भावनात्मक उतर चढ़ाव से ग्रसित लोग ऐसे साथी खोज रहे हैं जो आलोचना के बजाय उनकी बात को सही ठहराए।