हाल ही में रिलीज़ हुई तापसी पन्नू की अस्सी मूवी, जो कि अनुभव सिन्हा के द्वारा निर्देशित की गई है। इस मूवी का नाम इसलिए अस्सी रखा गया, क्योंकि देश में हर दिन लगभग अस्सी रेप के प्रक्रण दर्ज होते है। यह मूवी मैं हमे देखने को मिलता है कि कैसे लड़कियों के साथ दुष्कर्म होता है और उस दुष्कर्म के खिलाफ लड़ने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है। इस फिल्म में हमें एक अध्यापिका की कहानी देखते हैं। अध्यापिका जो रोज स्कूल पढ़ने जाती है, और रोज समय पर घर आ जाती थी, पर एक दिन वह उसके साथ काम कर रही साथी के घर हो रहे जश्न में, देर रात तक रुकी, जश्न खत्म होते ही वह अपने घर को निकल गई, घर जाते समय कुछ चार – पांच लोग रस्ते में उसका मुंह हाथ बंद कर उसे जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लेते है, फिर चारों-पांचों लोग उसके साथ दुष्कर्म करते है, और उसके बाद उसे मरने के लिए फेंक देते है, पर सुबह होते ही कुछ लोगों का ध्यान उस महिला पे गया जो कि गंभीर रूप से घायल ओर बेसुध पड़ी हुई थी, उसे जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंचाया गया, यह देखने को मिलेगा कैसे एक हादसे से उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है।
उसके बाद देखने को मिलता है, कैसे तापसी पन्नू उस महिला का केस लड़ती है और कैसे आरोपियों को सज़ा दिलवाती है। जिसके लिए उसे बहुत संघर्ष करना पड़ता है, उसका सामना बहुत से प्रभावशाली लोगों से होता है, फिर भी वय अंत तक लड़ती है और महिला को इंसाफ दिलाती है। फिल्म के हर 20 मिनट में हमें काली स्क्रीन देखने को मिलती है, जिसमें बताया जाता है कि अभी आप यह मूवी देख रहे है अब तक एक और दुष्कर्म ने अंजाम दे दिया होगा।
यह हमें दर्शाता है कि आज के समय मैं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है, उन्हें कैसे हर रोज किसी न किसी पीड़ा से गुजरना पड़ता है, इसकी वजह सिर्फ एक है कि कोई सख़्त कानून नहीं है, जो कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दे, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी के साथ भी दुष्कर्म करने के लिए सो बार सोचें।
छोटी सोच या छोटे कपड़े? परेशानी महिलाओं के छोटे कपड़ों में नहीं है, समाज की छोटी सोच में है, आज के समय में युवाओं को शिक्षित करना और भी जरूरी हो गया है, ताकि आगे जाकर वह किसी का भी जीवन बर्बाद न करे और आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाएं जाए।

