ग्वालियर। लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश ने ग्वालियर-चंबल अंचल के बांधों और नदियों की स्थिति बदल दी है। शहर की पेयजल लाइफलाइन कहे जाने वाले तिघरा बांध का जलस्तर 738 फीट के करीब पहुंच गया है। वहीं अंचल के कई बड़े जलाशयों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण नदियों का बहाव बढ़ गया है।
शिवपुरी, ग्वालियर, मुरैना और दतिया के नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। जल संसाधन विभाग बांधों में पानी की आवक और निकासी की लगातार निगरानी कर रहा है।
विषय सूची
- तिघरा बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा
- अपर ककैटो, ककैटो और पेहसारी से बढ़ी आवक
- हरसी बांध ओवरफ्लो, गांवों में मुनादी
- मड़ीखेड़ा बांध से सिंध नदी में छोड़ा पानी
- दतिया में नदी किनारे बसे गांव अलर्ट पर
- पगारा बांध के छह गेट खुले
- मौसम सक्रिय रहने से क्यों बनी हुई है चिंता
- लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
तिघरा बांध जलस्तर 738 फीट के करीब
ग्वालियर की पेयजल व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्रोत तिघरा बांध के लिए सितंबर की बारिश बड़ी राहत लेकर आई है। महीने की शुरुआत में बांध के जलस्तर को लेकर आने वाले महीनों की पेयजल व्यवस्था पर चिंता जताई जा रही थी, लेकिन कुछ ही दिनों की बारिश ने स्थिति बदल दी।
छह सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार तिघरा बांध का जलस्तर करीब 737 से 737.9 फीट तक पहुंच गया था। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि बांध में पानी की आवक तेज बनी हुई थी और जलस्तर लगातार बढ़ रहा था।
इससे एक दिन पहले, पांच सितंबर को तिघरा का जलस्तर 733.40 फीट बताया गया था। इस हिसाब से बेहद कम समय में बांध के जलस्तर में करीब साढ़े तीन फीट की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जलस्तर 738 फीट के आसपास पहुंचने पर परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा गेट खोलने की स्थिति बन सकती है। इसी कारण विभागीय अधिकारी बांध की आवक, जलस्तर और डाउनस्ट्रीम क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
अपर ककैटो, ककैटो और पेहसारी से बढ़ी पानी की आवक
तिघरा बांध के तेजी से भरने के पीछे उसके कैचमेंट क्षेत्र में हुई बारिश के साथ अपस्ट्रीम जलाशयों से पहुंच रहा पानी भी प्रमुख कारण है। अपर ककैटो, ककैटो और पेहसारी जलाशय ग्वालियर के पूरे जल तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं।
अपर ककैटो के कैचमेंट क्षेत्र में तेज बारिश के बाद बांध के गेट खोलकर पार्वती नदी में पानी छोड़ा गया। पांच सितंबर की रिपोर्ट में अपर ककैटो के पांच गेट खोले जाने और करीब 452.08 क्यूमेक्स पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई थी।
अपर ककैटो से छोड़ा गया पानी पार्वती नदी के रास्ते आगे हरसी बांध तक पहुंच रहा था। इससे हरसी बांध के जलस्तर और उसके निचले इलाकों में बहाव पर भी प्रभाव पड़ा।
ककैटो और पेहसारी जलाशयों में पर्याप्त पानी आने के बाद तिघरा की ओर पहुंची आवक ने ग्वालियर के मुख्य जलस्रोत के भरने की रफ्तार बढ़ा दी है। इससे शहर में आने वाले महीनों के संभावित पेयजल संकट की आशंका कम होने की उम्मीद बनी है।
हरसी बांध ओवरफ्लो, नदी किनारे के गांवों में मुनादी
भितरवार क्षेत्र स्थित हरसी बांध भी लगातार बारिश और अपस्ट्रीम से आ रहे पानी के कारण पूरी तरह भर गया। रिपोर्ट के अनुसार बांध का वेस्ट वियर करीब सवा फीट ऊपर से बह रहा था।
अपर ककैटो से छोड़ा गया पानी पार्वती नदी के माध्यम से हरसी बांध तक पहुंचने के कारण निचले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों से नदी के पास नहीं जाने की अपील की।
इन गांवों में पनानेर, कैथोदा, धोबट, खिरिया, बोढ़ी, जखावार, गधोटा, सिल्हा, पलायछा खेड़ा, नजरपुर, आदमपुर, आसन, भितरवार, मछरिया और पवाया शामिल हैं।
इसके अलावा घाटखेरिया, डडोमर, गोलेश्वर, सहारन, मसूदपुर, खरगोली और बासोड़ी सहित आसपास के गांवों के लोगों को भी सतर्क रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।
मड़ीखेड़ा बांध के गेट खुले, सिंध नदी पर बढ़ा दबाव
शिवपुरी जिले में बारिश का असर अटल सागर मड़ीखेड़ा बांध पर भी दिखाई दिया। बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद चार सितंबर से इसके चार गेट खोलकर सिंध नदी में पानी छोड़ा गया।
पांच सितंबर की स्थिति के अनुसार चार गेटों से करीब 519.074 क्यूमेक्स पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई। इसके अतिरिक्त पावर हाउस के माध्यम से करीब 135.42 क्यूमेक्स पानी की निकासी बताई गई।
इस तरह बांध से कुल निकासी करीब 654.494 क्यूमेक्स प्रति सेकंड रही। उस समय मड़ीखेड़ा बांध का जलस्तर 345.10 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि बांध का पूर्ण जलाशय स्तर यानी FRL 346.25 मीटर है।
छह सितंबर की रिपोर्ट में मड़ीखेड़ा बांध का जलभराव 92 प्रतिशत से अधिक पहुंचने और पानी की निकासी जारी रहने की जानकारी दी गई। इसका सीधा असर सिंध नदी के बहाव पर पड़ा।
दतिया में सिंध नदी किनारे बसे गांवों को अलर्ट
मड़ीखेड़ा, हरसी और अन्य अपस्ट्रीम जलाशयों से छोड़ा गया पानी दतिया जिले के सेंवढ़ा क्षेत्र तक पहुंचने के कारण सिंध नदी का जलस्तर बढ़ गया।
छह सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक मोहनिया सागर, हरसी और समोहा क्षेत्र से जल निकासी बढ़ने के बाद सिंध नदी का बहाव खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। सेंवढ़ा के सनकुआं क्षेत्र में घाट और छोटा पुल पानी में डूब गया।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी कराई। नदी के कछार क्षेत्र में मौजूद किसानों और पशुपालकों को सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने के लिए कहा गया।
किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने के लिए NDRF और SDRF की टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया।
मुरैना में पगारा बांध के सभी छह गेट खुले
मुरैना जिले में भी बारिश के बाद बांधों और नदियों पर दबाव बढ़ गया। पगारा बांध का जलस्तर बढ़ने के बाद उसके सभी छह ऑटोमेटिक गेट खुल गए।
एक रिपोर्ट के अनुसार बांध से करीब 40 हजार क्यूसेक पानी आसन नदी में छोड़ा गया। इसके बाद आसन नदी और उससे जुड़ी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा।
प्रशासन ने आसन नदी और उससे जुड़े जलप्रवाह के किनारे स्थित 32 गांवों में अलर्ट जारी किया। कई स्थानों पर खेतों में पानी पहुंचने की जानकारी भी सामने आई।
देवगढ़ थाना क्षेत्र के काबिल गांव में बढ़ते जलस्तर के कारण ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंच गया। इसके बाद SDRF और पुलिस ने मोटरबोट की सहायता से बचाव अभियान चलाया और करीब 40 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाला। बचाए गए लोगों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे।
बारिश अभी चिंता का कारण क्यों है?
छह सितंबर की सुबह 8:30 बजे से सात सितंबर की सुबह 8:30 बजे तक के मौसम पूर्वानुमान में ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, भिंड, मुरैना और श्योपुर सहित कई जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी।
सात सितंबर के लिए भारी बारिश का प्रमुख क्षेत्र पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों को बताया गया था। हालांकि ग्वालियर-चंबल अंचल के जिलों में भी गरज-चमक के साथ मौसम सक्रिय रहने की चेतावनी बनी हुई थी।
बारिश जारी रहने पर बांधों में पानी की आवक दोबारा बढ़ सकती है। इसलिए जलाशयों के जलस्तर, गेटों से छोड़े जा रहे पानी और नदियों के बहाव पर लगातार निगरानी जरूरी है।
तिघरा भरने से ग्वालियर को बड़ी राहत
तिघरा बांध का जलस्तर 738 फीट के करीब पहुंचना ग्वालियर की पेयजल व्यवस्था के लिए राहत की खबर है। अपर ककैटो, ककैटो, पेहसारी और हरसी जैसे जलाशयों में पर्याप्त पानी आने से पूरे जल तंत्र को मजबूती मिली है।
यह पानी शहर की आगामी महीनों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि जलाशयों के पूर्ण क्षमता के करीब पहुंचने के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ना जरूरी हो जाता है, जिससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में खतरा बढ़ सकता है।
लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
प्रशासन और जल संसाधन विभाग की चेतावनियों को देखते हुए लोगों को इन सावधानियों का पालन करना चाहिए:
- नदी, नाले और बांध के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में जाने से बचें।
- उफनते रपटे या पुलिया को पैदल अथवा वाहन से पार न करें।
- नदी के कछार में पशुओं को चराने न ले जाएं।
- बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें।
- प्रशासन की मुनादी और आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें।
- पानी बढ़ने पर तत्काल ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर जाएं।
- आपात स्थिति में पुलिस, प्रशासन या राहत दल को सूचना दें।
राहत के साथ सावधानी भी जरूरी
ग्वालियर के लिए तिघरा बांध का भरना पेयजल के लिहाज से राहत देने वाला घटनाक्रम है। दूसरी ओर अलग-अलग जलाशयों से छोड़े जा रहे पानी के कारण सिंध, पार्वती और आसन जैसी नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में जोखिम बना हुआ है।
ऐसे में नदी किनारे के लोगों को बांधों से पानी छोड़े जाने की सूचना को गंभीरता से लेना चाहिए। हालात सामान्य होने तक नदी, नाले, रपटे, पुलिया और बांधों के निचले क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है।

