केरल के कन्नूर के घने जंगल में स्थित ‘अक्करा कोट्टीयूर ‘ शिव जहाँ प्राकृतिक का एक अनोखा दृश्य देखने को मिलता है । यह कि खास बात ये है कि ये शिव मंदिर चारों ओर से घने पेड़ों और पहाड़ों से घिरा हुआ है। यह प्राकृतिक देन है । वैसे तो ये मंदिर पूरे साल वीरान रहता है।एक अनोखी बात ये भी है इसकी यहाँ जो मंदिर बना है बो पूरी तरह कच्चा है इस मंदिर की इमारत पक्की नहीं है । यहाँ की जो शिवलिंग बो स्वयंभू मानी जाती है।और हमेशा ही जलमग्न रहती है । वैशाख उत्सव में इस मंदिर पूजन किया जाता है बो भी केवल 21दिन तक ये महोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें भगवान शिव के प्रतीक को को सजाकर हाथी पर बैठाकर नदी से गुजारा जाता है।इसकी खास बात ये है कि यहां जो पूजा की जाती है बो इको फ्रेंडली तरीके से की जाती है।जहां आज के समय में दिखावा जरूरत बन गया वही ये मंदिर और यहां के लोग आज की दुनिया से कोसों दूर दिखाई देते है।
जहां एक तरफ ये मंदिर पूरे साल में केवल 21दिन भक्तों चहल पहल देखने को मिलती है वहीं दूसरी ओर से देखा जाए यहां एक सुकून सा है घने जंगलों के बीच शांति ही और प्राकृतिक की गोद में बना ये मंदिर अपनी एक अलग कहानी बताता है जहां की आस्था में कोई मिलावट नहीं और अपने भगवान के प्रतीत लगाव को दर्शाता है । प्रकृति स्वयं भगवान शिव का श्रृंगार करती और उनका अभिषेक भी करती है ।मान्यताओं के अनुसार यहां प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था ।जिसमें उसने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा और भगवान शिव को नहीं बुलाया,जिसे माता सती ने अपने पति का अपमान समझकर स्वयं को उसी यज्ञ में भस्म कर लिया। जिसके कारण भगवान शिव को बहुत क्रोध आया और उन्होंने ताण्डव किया।

