जरा सोचिए आप घंटों कतार पर खड़े हैं भगवान के दर्शन के लिए इंतजार में है और उसी वक्त कुछ VIP हेलीकॉप्टर, होटल और अलग ट्रीटमेंट के साथ आपकी कतार को ठेंगा दिखाकर अचानक आगे बढ़ जाते हैं तो ऐसे में कथित तौर पर श्रद्धालुओं के चढ़ावे के पैसे का इस्तेमाल सवाल तो खड़े करता है और यह सवाल जब राइट टू इनफार्मेशन यानी सूचना के अधिकार के तहत किए गए, तो फिर जवाब में किसी तरह का संदेह नहीं किया जा सकता। देश के चार धामों में शुमार केदारनाथ बद्रीनाथ जैसे बड़े तीर्थ स्थल पर हो रहा हो, तो फिर आस्था भक्ति श्रद्धा इस सबसे और उनके लिए किए जाने वाले इंतजारों से आम भक्ति का भरोसा उठना स्वाभाविक है दरअसल हम बात कर रहे हैं श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति यानी कटक की जो एक बार फिर आरटीआई के जरिए सवालों में झुलस रही है जो पैसा आम भक्तों से दान दक्षिणा में समिति को मिलता है चढ़ने के तौर पर लोग अपनी गाड़ी कमाई अपने ईश्वर के चरणों में बड़े ही श्रद्धा भाव से अर्पित करते हैं उस पैसे का इस्तेमाल यदि मुट्ठी भर पूंजी पतियों के सत्कार में लगा दिया जाए, तो फिर आम भक्ति सवाल तो खड़े करेंगे।
कहां और कितना हुआ खर्च ?
अब हम आपको एक के बाद एक सिलसिलेवार तरीके से बता रहे हैं कि आखिर माजरा क्या है आरटीआई के जरिए सामने आई जानकारी ने खुलासा कर दिया है मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी के नाम पर मंदिर समिति ने ₹60,000 का खर्चा एक झटके में दिखा डाला तो वही केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर करीब सैंतीस 37 हजार 500 रुपये, CEO के निजी सहायक यानी PA पर करीब 23 हजार रुपये और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी के नाम पर करीब 22 हजार रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। इतना ही नहीं सत्ता प्रतिष्ठान में बैठे कुछ नेताओं और उनसे जुड़े संगठनों के विशिष्ट व्यक्तियों पर प्रति व्यक्ति 20 से 24000 रुपए का खर्चा RTI से मिले दस्तावेजों में दिखाया गया है दरअसल विकेश सिंह नेगी
RTI एक्टिविस्ट का आरोप है कि VIP मेहमाननवाजी पर कुल मिलाकर 4 से 5 लाख रुपये या उससे ज्यादा की राशि खर्च की गई। हालांकि BKTC सहित इन आरोपों से घिरे नेताओं और उनके रिश्तेदारों ने समूचे मामले से पल्ला झाड़ते हुए दावा किया है कि उन्होंने खुद अपने खर्चे से भोलेनाथ के दर्शन किए थे ना की मंदिर समिति के खर्चे पर उन्होंने माथा टेका था कहते हैं कि बिना आग के धुआं नहीं उठता। लिहाजा अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर श्रद्धालुओं का पैसा वीआईपी कल्चर की भेंट क्यों चढ़ गया कि आखिर देश भर से तमाम परेशानियां उठाकर सुदूर बद्रीनाथ तक पहुंचने वाले आम श्रद्धालुओं का आस्था के सैलाब के बीच यह कैसा आर्थिक प्रबंधन बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति कर रही है
सवाल उठता है की सनातन के प्रति सजग रहने वाली सरकार के बीच आम जनता के सरोकारों का मखौल उड़ाने की इजाजत मंदिर समिति को किसके इशारे पर दी गई अब यह देखना दिलचस्प होगा की मंदिर समिति पर आरटीआई के जरिए लगे आरोपीयों के बाद सरकार किस तरह निष्पक्ष जांच करके अपनी छवि पर लगे दाग को धोती है क्योंकि इस राज्य में धार्मिक पर्यटन आम लोगों की रोजी-रोटी का सबसे बड़ा जरिया है।

