“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ“ केवल एक सरकारी अभियान नहीं है बल्कि समाज की सोच बदलने की एक अच्छी शुरुआत है । आज के समय में बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं । वे पढ़ाई खेल नौकरी बिज़नेस जैसे कई क्षेत्रों में सफलता हासिल कर रही हैं । फिर भी हमारे समाज में कई जगह ऐसी सोच देखने को मिलती है ।इसी सोच को बदलने के लिए यह अभियान शुरू किया गया ।
पहले के समय में बहुत से लोग बेटियों की पढ़ाई को जरूरी नहीं मानते थे । उन्हें घर के कामों तक सीमित रखा जाता था । लेकिन अब समय बदल चुका है । तो वह सिर्फ खुद का नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य बेहतर बनाती है । बेटियों को अच्छी शिक्षा देना बहुत जरूरी है । शिक्षा से उनमें आत्मविश्वास आता है और वे अपने पैरों पर खड़ी हो पाती हैं । आज कई बेटियाँ अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं ।इसलिए हमें बेटियों को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए ।
सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बेटियों की सुरक्षा और सम्मान भी बहुत जरूरी है। समाज के हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि बेटियाँ बोझ नहीं बल्कि परिवार की ताकत होती हैं । हमें उनके साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए और उन्हें बराबरी का अधिकार देना चाहिए। “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” एक ऐसा संदेश है जो हर व्यक्ति तक पहुँचाना चाहिए। जब बेटियाँ सुरक्षित शिक्षित और आत्मनिर्भर होंगी तभी हमारा समाज और देश सही मायनों में आगे बढ़ पाएगा ।