हिंदू धर्म के अंदर बुद्ध पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व है। यह पर्व बोध धर्म में आस्था रखने वालों के लिए एक प्रमुख त्यौहार माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, कहा जाता है कि इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण हुआ था। इस त्योहार को मुख्यता भारत, चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाईलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, पाकिस्तान तथा विश्व के विभिन्न देशों में मनाया जाता है।
भारत में स्थित बिहार राज्य के बोधगया नामक स्थान हिन्दू व बौद्ध धर्मालंबियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थान है। जब गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ यह इनका असली नाम था) अपने घर को छोड़ कर सत्य की तलाश में 7 साल तक वन में भटकते रहे। इस दौरान उन्होंने कठिन तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में उन्हें बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व के ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू और बौद्ध दोनों हे धर्म के लोगे के लिए महत्वपूर्ण है, ऐसी मान्यता हैं कि इसी दिन भगवान बोध ने भगवान विष्णु के नौवें अवतार के रूप में जन्म लिया था।
हिंदू धर्म के अंदर इस पर्व पर स्नान, दान करने के साथ–साथ भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी के साथ चंद्र देव की पूजा करने का भी विधान है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन कुछ नियमों और बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। हालांकि, आज के युग में मनुष्य के लिए या कर पाना कठिन हो गया है लेकिन अगर वो इन बातों का ध्यान रखें तो यक़ीनन उनके जीवन में एक सार्थक बदलाव जरूर आएगा। जैसे– आज के दिन पूर्ण रूप से झूठ बिलकुल भी ना बोले, आज के दिन किसी का भी अपमान भी ना करें, तामसिक भोजन का सेवन तो ना ही करें और आज सभी के साथ शांत और संयमित व्यवहार रखें।
भगवान बौद्ध ने हमें कई शिक्षा दी हैं जिसमें सच्ची शांति और सुख बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही मौजूद हैं। इनके अनुसार अगर मनुष्य जीवन में सच्ची सफलता और संतोष पाना चाहता है तो उस व्यक्ति को पहले स्वयं पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।
गौतम बुद्ध की वह बात जो जीवन को प्रेरणादायक बनाती हैं
जिस तरह से तूफान एक मजबूत पत्थर को हिला नहीं पाता, ठीक उसी तरह से समझदार व्यक्ति अपनी तारीफ या आलोचना से प्रभावित नहीं होते हैं।
क्रोध को प्यार से, बुराई को अच्छाई से, स्वार्थी को उदारता से और झूठे व्यक्ति को सच्चाई से जीता जा सकता है।
ईर्ष्या और नफरत की आग में जलते हुए इस संसार में खुशी और स्थायी नहीं हो सकती। अगर आप अँधेरे में डूबे हुए हैं, तो आप रौशनी की तलाश क्यों नहीं करते।
एक जागे हुए व्यक्ति को रात बड़ी लम्बी लगती है, एक थके हुए व्यक्ति को मंजिल बड़ी दूर नजर आती है। इसी तरह सच्चे धर्म से बेखबर मूखौँ के लिए जीवन-मृत्यु का सिलसिला भी उतना ही लंबा होता है।