महिलाओं की खामोशी, चुप्पी और समाज की घिनौनी सच्चाई: चिरैया

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महिलाओं की खामोशी, चुप्पी और समाज की घिनौनी सच्चाई: चिरैया

इस फ़िल्म मैं एक युवक जिसका नाम विनय कुमार होता है उसका विवाह एक पूजा नाम की लड़की से करवा दिया जाता है। यह शादी दोनों के परिवार बहुत ही खुशी और उत्साह के साथ करवाते है, लेकिन उसके बाद जब पूजा (मेन कैरेक्टर )जब वह असहज होकर विरोध करती है, फिर भी उसकी सहमति और इच्छा को उसका पति नजरअंदाज कर जबरन उसके साथ संबंध बनाता है यही से शुरू होता है वैवाहिक बलात्कार जैसा घिनौना अपराध।

फ़िल्म चिरैया एक बहुत ही नाजुक और अहम मुद्दे-marital rape (वैवाहिक बलात्कार) को दर्शाती है जिसमें महिलाओं के खिलाफ हो रहे इस घिनौने अपराध को समाज सालों से यूँ ही चुप्पी सादे बैठा है। वैसे तो शादी एक ऐसा रिश्ता होता है जहां दोनों दाम्पत्य एक दूसरे के ना केवल जीवनसाथी बनते है बल्कि एक दूसरे को सहारा देकर भरोसेमंद साथी बनने का भी वादा करते है। लेकिन फिल्म चिरैया समाज की उस घिनौने सच को उजागर करती है जहां शादी के इस पवित्र रिश्ते को कुछ लोग सदियों से शर्मसार करते आ रहे है। कैसे महिला की इच्छा और सहमति को यह रूढ़िवादी समाज अपने स्वार्थ और फायदे के लिए नजरअंदाज करते आ रहा है। महिलाओं के खिलाफ हो रहे इस शोषण से ना केवल वह शारीरिक तनाव से गुजरती है, बल्कि वे मानसिक तोर पर भी बहुत कुछ चुप चाप सह जाती है।

यह कहानी कोई ड्रामा या मनोरंजन हेतु नहीं बल्कि समाज को मैरिटल रेप जैसे मुद्दे से रूबरू करना है। जिससे लोग जागरूक हो सके खासकर के महिलाएं जो कई सालों से अपने साथ हो रहे अत्याचार को चुप-चाप सहती आ रही है। इसी फिल्मों से उन्हें भी अपने खिलाफ हो रहे अपराध के विरुद्ध बोलने की हिम्मत मिलेगी और वह अपने हक के लिए आवाज उठा पाएगी।

ये कहानी केवल एक महिला की नहीं बल्कि हर उस स्त्री के जीवन को दर्शाती है, जिन्होंने कभी ना कभी अपने जीवन मैं यह सब सहा है। भारत देश मैं मैरिटल रेप जैसे अपराध पर अभी भी बहस जारी है, जहां आये दिन अलग-अलग विचार सामने आते है। ऐसे मैं चिरैया जैसी कहानी समाज से जुड़े इस जरूरी मुद्दों में जागरूकता फैलाना का काम करती है।

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