अमेरिका एक बार फिर हुआ विफल: चीनी टैंकर्स नाकाबंदी के बीच अपने टैंकर्स पार करा ले गए

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अमेरिका एक बार फिर हुआ विफल: चीनी टैंकर्स नाकाबंदी के बीच अपने टैंकर्स पार करा ले गए

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पेशकश की थी। दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एकत्र होकर बातचीत के लिए शामिल हुए। लेकिन यह बातचीत विफल साबित हुई और दोनों ही देशों ने इसकी विफलता का ठीकरा एक दूसरे पर मड़ दिया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल ट्रंप की धमकियों का सिलसिला फिर शुरू हो गया। पहले उन्होंने यह बोला कि हम होर्मुज की घेराबंदी कर रहे हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि अब अगर किसी भी जहाज़ ने ईरान को होर्मुज पार  करने के लिए टोल दिया तो उसको हम तबाह कर देंगे और यह से पार नहीं होने देंगे। डोनल्ड ट्रंप के इस तानाशाही भरे रवैये का असर क्रूड ऑयल के बढ़ते दामों पर हो रहा है।

चीन ने पार कराया ‘रिच स्टार्री’ नामक टैंकर

अमेरिका के सख्त हिदायद के बावजूद चीन नहीं डरा और रिच स्टार्री नाम के टैंकर को होर्मुज पार करा कर पारस की खाड़ी से बाहर निकल ले गया। अगर शिपिंग के डेटा के माने तो नाकाबंदी के बाद ऐसा करने वाला ये पहला जहाज है। इस जहाज में करीब 2.5 लाख बैरल मेथेनॉल लदा हुआ था, जिसे (यूएई) के हमरिया पोर्ट से चढ़ाया गया था। इस टैंकर की कंपनी पर अमेरिका के द्वारा पहले से ही प्रतिबंध लगे हुए है, इसके बावजूद वह इसका कुछ ना बिगड़ सके। इस पहल के बाद एक चीज स्पष्ट है, अमेरिका बस उन्हीं देशों को डरा धमका सकता है, जिसको वह कंट्रोल करता है। यह फिर जिनसे वह व्यापारिक सौदे के लाभ देता लेता रहता हो। उसके अलावा वह चीन, रूस और अन्य यूरोपीय प्रभावशाली देशों से सीधे टक्कर लेने की दम नहीं रखता।

इस तनावपूर्ण हालात को सुलझाने में कितना समय लगेगा इसका आकलन करना तो मुश्किल है, लेकिन एक बात स्पष्ट है के ईरान और अमेरिका–इजरायल के बीच चला आ रहा है ये तनाव दुनिया भर के देशों के लिए महंगा साबित हो रहा है।