खेतों में और घरों में खजाने व सिक्के मिलने के मामले बहुत सुने होंगे पर इस बार खजाना सड़क पर मिला है। असल में छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव में बसंत पंचमी का मेला लगा था जहां मेले की तैयारी जोर-शोर पर थी मेले तक आने जाने के रास्ते को ठीक करने की मरम्मत की गई।
मरम्मत के लिए पुराने थाने के पास पहले से स्टाफ क्वार्टर से हुई खुदाई की मिट्टी का उपयोग किया गया । कुछ दिन पूर्व हुई बारिश से जब मिट्टी का कटाव हुआ, तो शताब्दियों पुराने सिक्के सतह पर आ गए, तभी गांव के एक बच्चे की नजर उन पर पडी। फिर क्या पूरा गांव फावड़े, सब्बल आदि लेकर खजाने की खोज में सड़क खुदाई में निकल पड़ा, जिसमें से 10 से 15 लोगों को कुछ सिक्के मिले बाकी को निराशा हाथ लगी।
17वी शताब्दी में बने राजगढ़ पैलेस का निर्माण महाराजा व उनके पोते हिंदूपंत बुंदेला के मध्य का माना जाता है प्रसिद्ध बाजीराव मस्तानी प्रेम कहानी का जीवंत गवाह भी रहा है इस महल में आज भी मस्तानी दरवाजा मौजूद है। कहा जाता है की सियासत कल में इस महल का उपयोग टकसाल के रूप में किया जाता था यहां मिले सिक्के मूल्य कालीन है जिस पर अरबी भाषा अंकित है।