केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने वाला बड़ा ऐलान करते हुए तुअर, मसूर और उड़द जैसी दलहन फसलों की 100% खरीद सुनिश्चित करने की घोषणा की है। राज्यसभा में शुक्रवार को एमएसपी को लेकर जोरदार बहस हुई, जिसमें कांग्रेस ने किसानों की पुरानी मांग को लेकर एमएसपी की कानूनी गारंटी को फिर से उठाया। सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने पूछा कि जब किसान आंदोलन कर रहे हैं, तो केंद्र की वास्तविक योजना क्या है?
जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदी सरकार खेती की लागत पर 50% लाभ जोड़कर एमएसपी तय कर रही है और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए सरकार ने 50% लाभांश बढ़ाने के फार्मूले को “मंडी में विकृति पैदा करने वाला” बताया था, जबकि आज केंद्र किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि दालों की खरीद 100% सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसान को अपनी उपज का पूरा मूल्य मिल सके।
चौहान ने बहस के दौरान कई राज्य सरकारों पर एमएसपी पर खरीद में अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक का उदाहरण दिया, जहां उनके मुताबिक राज्य सरकार ने 2024–25 के लिए जितनी तुअर खरीद की मंजूरी ली थी, उतनी खरीदी भी नहीं। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई राज्य खरीद प्रक्रिया में ढिलाई दिखाता है, तो केंद्र सरकार नैफेड जैसी एजेंसियों के जरिए सीधे खरीद करेगी ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।
वहीं कांग्रेस ने सरकार को जवाब देते हुए कहा कि वह सवालों का सीधा जवाब नहीं दे रही। मुकुल वासनिक ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में 1 लाख 12 हजार किसानों ने आत्महत्या की है, जो ग्रामीण संकट की गंभीरता को दर्शाता है। खरीद प्रक्रिया और एमएसपी के फार्मूले पर दोबारा सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की वास्तविक आय पर बात करने से बच रही है।
एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर किसानों का आंदोलन फिर तेज हो रहा है। इस मुद्दे पर राज्यसभा की बहस ने केंद्र बनाम राज्य और सरकार बनाम विपक्ष दोनों ही मोर्चों पर टकराव को और गहरा कर दिया है। जहां केंद्र सरकार खुद को किसानों का हितैषी बताती है, वहीं विपक्ष खरीद व्यवस्था, आय बढ़ोतरी और सरकारी दावों की सच्चाई पर बड़ा सवाल उठा रहा है।