प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत संपन्न होने की राजनीतिक घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए और समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में सहयोग और आपदा जोखिम प्रबंधन पर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “अपने दो करीबी दोस्तों यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का इस अभूतपूर्व भारत यात्रा पर स्वागत करने में मुझे बेहद खुशी हो रही है…कल ऐतिहासिक क्षण था जब पहली बार यूरोपियन यूनियन के नेता भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूरोपियन यूनियन के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक तालमेल और लोगों के बीच मजबूत संबंधों के चलते हमारी साझेदारी नई उच्चाइयों तक पहुंच रही हैं। आज हमारे बीच 180 बिलियन यूरो का ट्रेड है। 8 लाख से अधिक भारतीय यूरोपियन यूनियन के देशों में रह रहे हैं और सक्रिय योगदान दे रहे हैं…आज भारत ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट संपन्न किया है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज 27 तारीख है, ये सुखद संयोग है कि आज ही के दिन यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ भारत ये FTA कर रहा है। ये FTA हमारे किसानों, छोटे उद्योगों की यूरोपियन मार्केट तक पहुंच आसान बनाएगा। मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और सर्विस सेक्टर के बीच सहयोग को और प्रबल करेगा।”
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “रक्षा और सुरक्षा सहयोग किसी भी रणनीतिक साझेदारी की नींव होती है। आज हम इसे सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप के जरिए औपचारिक रूप दे रहे हैं। इंडो पैसिफिक में हमारे सहयोग का दायरा और बढ़ेगा। हमारी डिफेंस कंपनी सहविकास एवं सहउत्पादन के नए अवसर साकार करेगी।”
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने कहा, “आज हम अपनी ट्रेड बातचीत संपन्न कर रहे हैं। हमने इसे पिछली बैठक में फिर से शुरू किया था, जिसे होस्ट करने का मौका मुझे मई 2021 में अपनी पिछली भूमिका में मिला था। हमारा समिट दुनिया को एक साफ संदेश देता है। ऐसे समय में जब ग्लोबल ऑर्डर को मौलिक रूप से बदला जा रहा है, यूरोपियन यूनियन और भारत रणनीतिक और भरोसेमंद साझोदार के तौर पर एक साथ खड़े हैं। आज, हम अपनी साझेदारी को अगले लेवल पर ले जा रहे हैं। दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते, हम अपने नागरिकों के लिए ठोस फायदे पहुंचाने और एक मजबूत ग्लोबल ऑर्डर बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं जो शांति और स्थिरता, आर्थिक विकास और सतत विकास को बढ़ावा दे।”
यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने कहा, “एक बहुध्रुवीय दुनिया में, यूरोपियन यूनियन और भारत मिलकर साझा समृद्धि के क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन सुरक्षा के बिना समृद्धि नहीं हो सकती। हमारे नागरिकों और हमारे साझा हितों की बेहतर सुरक्षा के लिए अपने सहयोग को मज़बूत करें, इंडो-पैसिफिक, यूरोप और दुनिया भर में हमारे सामने आने वाले सभी तरह के सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करें, ताकि हमारे बीच रणनीतिक विश्वास का एक नया स्तर हासिल हो सके। यही हमारे सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हुए समझौते का महत्व है। भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच यह पहला ऐसा व्यापक रक्षा और सुरक्षा समझौता है
यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने कहा, “भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारे दोनों महाद्वीपों के बीच सदियों से व्यापार होता रहा है। व्यापार एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्टेबलाइजर है और आर्थिक विकास का बुनियादी स्रोत है। व्यापार समझौते नियमों पर आधारित आर्थिक व्यवस्था को मज़बूत करते हैं और साझा समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। इसीलिए आज का मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक महत्व का है। यह अब तक हुए सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है, जिससे 2 अरब लोगों का बाज़ार बनेगा।”
भारत-EU FTA पर हस्ताक्षर होने पर यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, “यह भारतीय कौशल, सेवाओं और स्केल को यूरोपियन प्रौद्योगिकी, पूंजी और नवाचार के साथ लाता है। इससे विकास का ऐसा स्तर बनेगा जो कोई भी पक्ष अकेले हासिल नहीं कर सकता। अपनी ताकतों को मिलाकर, हम ऐसे समय में रणनीतिक निर्भरता कम करते हैं जब ट्रेड को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”