17 से 21 अगस्त तक पुणे में BRICS ICT Track के तहत डिजिटल सहयोग, साइबर सुरक्षा, AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की नेटवर्क तकनीकों पर मंथन; भारत की अध्यक्षता में डिजिटल साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
टी.एन. मनीष
पुणे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीकी सुविधा का विषय नहीं रह गया है। साइबर सुरक्षा, डेटा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भरोसेमंद नेटवर्क जैसी तकनीकें अब सीधे आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति से जुड़ चुकी हैं। ऐसे समय में भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता के दौरान आयोजित BRICS ICT Track को तकनीकी सहयोग के साथ-साथ डिजिटल कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आपके दिए विवरण के अनुसार, 17 से 21 अगस्त 2026 तक पुणे में पांच दिवसीय BRICS ICT Track आयोजित हो रहा है, जिसमें BRICS देशों के बीच सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा होगी। इस मंच का फोकस साइबर सुरक्षा, डिजिटल इकोसिस्टम, AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की नेटवर्क तकनीकों जैसे मुद्दों पर है।
भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता के तहत Department of Telecommunications ने पहले ही ICT सहयोग के लिए resilient digital infrastructure, cybersecurity, future networks, Digital Public Infrastructure, capacity building और inclusive digital transformation को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया है।
BRICS ICT Track आखिर क्यों है महत्वपूर्ण?
डिजिटल दुनिया में प्रतिस्पर्धा अब केवल तेज इंटरनेट या अधिक मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रह गई है। किसी देश की डिजिटल क्षमता का आकलन उसकी कंप्यूटिंग क्षमता, सुरक्षित नेटवर्क, डेटा सुरक्षा, साइबर लचीलापन, तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला और AI क्षमता जैसे कई पैमानों पर किया जा रहा है।
यही कारण है कि BRICS के भीतर ICT सहयोग को केवल तकनीकी संवाद नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS देशों ने डिजिटल क्षेत्र में सुरक्षित, स्थिर, भरोसेमंद और इंटरऑपरेबल ICT वातावरण बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा, गलत सूचना और तकनीक के दुरुपयोग जैसी चुनौतियां भी इस एजेंडे का हिस्सा हैं।
AI और साइबर सुरक्षा होंगे चर्चा के केंद्र में
AI की तेजी से बढ़ती भूमिका ने डिजिटल नीति को पूरी तरह बदल दिया है। एक ओर AI से स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, प्रशासन और व्यापार में नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर हमले, डेटा सुरक्षा, डीपफेक, गलत सूचना और तकनीक के दुरुपयोग जैसे जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
भारत की BRICS ICT पहल में AI in telecom, future networks और डिजिटल सहयोग से जुड़े क्षेत्रों को लेकर पहले से चर्चा हो रही है। मई 2026 में BRICS ICT Working Group की बैठक में भी AI, भविष्य के नेटवर्क, Digital Public Infrastructure, साइबर सुरक्षा और डिजिटल क्षमता निर्माण जैसे विषय प्रमुख रहे थे।
ऐसे में पुणे की बैठक का महत्व इस बात में है कि तकनीक के विकास के साथ उसकी सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग पर भी समान रूप से जोर दिया जाए।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत का अनुभव
भारत ने बड़े पैमाने पर Digital Public Infrastructure (DPI) विकसित करने का अनुभव हासिल किया है। यह मॉडल डिजिटल पहचान, भुगतान और सार्वजनिक सेवाओं की डिजिटल पहुंच जैसे क्षेत्रों में चर्चा का विषय रहा है।
BRICS के भीतर इस अनुभव को साझा करना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर हो सकता है। अलग-अलग देशों के डिजिटल इकोसिस्टम भले ही अलग हों, लेकिन सुरक्षित डिजिटल सेवाओं, इंटरऑपरेबिलिटी और नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म की जरूरत लगभग सभी जगह मौजूद है।
BRICS ICT Working Group ने capacity building और सहयोगी संस्थागत ढांचे को भी महत्वपूर्ण माना है, जिसमें प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान और डिजिटल तकनीकों में कौशल विकास पर जोर दिया गया है।
साइबर सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा
डिजिटल नेटवर्क पर निर्भरता बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा का महत्व भी कई गुना बढ़ गया है। बैंकिंग, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य, परिवहन और सरकारी सेवाओं का बड़ा हिस्सा डिजिटल सिस्टम से जुड़ा है।
ऐसे में किसी बड़े साइबर हमले का असर केवल किसी कंपनी या वेबसाइट तक सीमित नहीं रह सकता। यह आर्थिक गतिविधियों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को भी प्रभावित कर सकता है।
इसी वजह से BRICS देशों के बीच साइबर सुरक्षा सहयोग, सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क, साइबर अपराध से मुकाबला और तकनीकी मानकों पर बेहतर समन्वय महत्वपूर्ण होता जा रहा है। BRICS दस्तावेजों में ICT सुरक्षा, साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल वातावरण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया गया है।
सेमीकंडक्टर और AI: अगली डिजिटल दौड़ का आधार
भारत की डिजिटल रणनीति में AI के साथ-साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को भी महत्वपूर्ण स्थान मिल रहा है। भविष्य की AI प्रणाली, डेटा सेंटर, दूरसंचार उपकरण और उन्नत डिजिटल नेटवर्क के लिए शक्तिशाली कंप्यूटिंग और चिप तकनीक जरूरी होगी।
इसलिए आने वाली डिजिटल प्रतिस्पर्धा केवल सॉफ्टवेयर या इंटरनेट स्पीड की नहीं होगी। चिप निर्माण, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा सेंटर, सुरक्षित नेटवर्क, ऊर्जा दक्षता और कुशल मानव संसाधन भी किसी देश की तकनीकी ताकत के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।
BRICS के भीतर तकनीकी सहयोग बढ़ने से विकासशील देशों के लिए तकनीक, कौशल और डिजिटल क्षमता निर्माण के नए अवसर भी बन सकते हैं।
भारत के लिए कूटनीतिक अवसर कितना बड़ा?
भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक डिजिटल व्यवस्था तेजी से बदल रही है। AI governance, साइबर सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता, डेटा और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दे अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का हिस्सा बन चुके हैं।
भारत के लिए BRICS ICT Track केवल तकनीकी विशेषज्ञों की बैठक नहीं है। यह ऐसा मंच है जहां भारत अपने Digital Public Infrastructure, दूरसंचार क्षमता, डिजिटल नवाचार और तकनीकी सहयोग के अनुभव को सामने रख सकता है और दूसरे देशों की जरूरतों तथा अनुभवों से सीख भी सकता है।
भारत की BRICS अध्यक्षता का व्यापक फोकस resilience, innovation, cooperation और sustainability पर आधारित है, जबकि ICT Track के तहत “Innovate, Cooperate and Transform (ICT) for a Resilient Future” जैसी दिशा तय की गई है।
क्या डिजिटल सहयोग से BRICS देशों को आर्थिक फायदा होगा?
डिजिटल सहयोग का असर केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल नेटवर्क व्यापार, बैंकिंग, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और सीमा-पार डिजिटल सेवाओं को बेहतर बना सकते हैं।
यदि BRICS देश तकनीकी मानकों, साइबर सुरक्षा, डेटा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाते हैं, तो इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था में भरोसा और पारस्परिक कारोबार की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
यही कारण है कि BRICS ICT Track को आने वाले वर्षों की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
भारत के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती
भारत के सामने चुनौती सिर्फ तकनीकी उपलब्धियां हासिल करने की नहीं है। AI और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार तभी टिकाऊ होगा जब उसके साथ साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, कौशल विकास, ऊर्जा दक्षता और डिजिटल समावेशन भी मजबूत किया जाए।
डिजिटल तकनीक जितनी तेज होगी, उसके दुरुपयोग की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ेंगी। इसलिए सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आने वाले वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण नीति चुनौती होगी।
निष्कर्ष
पुणे में हो रहा BRICS ICT Track भारत की डिजिटल यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। AI से लेकर साइबर सुरक्षा और Digital Public Infrastructure से लेकर भविष्य के नेटवर्क तक, चर्चा का दायरा यह दिखाता है कि डिजिटल तकनीक अब देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का अहम हिस्सा बन चुकी है।
भारत के लिए यह अवसर है कि वह अपने डिजिटल अनुभव को वैश्विक दक्षिण के साथ साझा करे, नई तकनीकी साझेदारियां बनाए और ऐसी डिजिटल व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे जो तेज होने के साथ सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी और आत्मनिर्भर भी हो।
आज का विचार:
“भविष्य उसी का होगा जो तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ तेज बनने के लिए नहीं, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनने के लिए भी करेगा।”
सांध्य संदेश:
डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ सुरक्षा भी जरूरी है। AI और इंटरनेट के विस्तार के साथ साइबर जागरूकता, डेटा सुरक्षा और भरोसेमंद डिजिटल व्यवस्था को भी उतना ही महत्व देना होगा।

