नई दिल्ली। ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) की स्थापना की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को नई दिल्ली में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर परियोजना की प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की।
ग्वालियर में प्रस्तावित इस परियोजना को एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन बताया जा रहा है। बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय, बुनियादी सुविधाओं और निवेशकों की आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विषय सूची
- दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक
- अधिकारियों को दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश
- ₹5,500 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव
- 18 हजार से अधिक रोजगार की संभावना
- प्रथम चरण में विकसित होगा 170 एकड़ का क्लस्टर
- ग्वालियर में प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण
- शहर के औद्योगिक विकास पर संभावित असर
ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन की कार्ययोजना की समीक्षा
नई दिल्ली में आयोजित बैठक के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अधिकारियों से ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन से जुड़े कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने परियोजना की आगामी कार्ययोजना और जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना से संबंधित सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने निर्धारित समयसीमा के अनुरूप कार्य पूरा करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया।
निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के निर्देश
बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रस्तावित TMZ में निवेश करने वाली कंपनियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पहले से ठोस तैयारी की जानी चाहिए। अधिकारियों से औद्योगिक इकाइयों के लिए अनुकूल वातावरण और जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने को कहा गया।
सिंधिया ने जमीनी स्तर पर चल रहे कार्यों में तेजी लाने के साथ ही विभागीय प्रक्रियाओं को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए, ताकि परियोजना के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी न हो।
जुलाई 2026 में हुआ था महत्वपूर्ण MoU
ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन की स्थापना के लिए 30 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इस समझौते के बाद परियोजना को निवेशकों तक पहुंचाने और टेलीकॉम तथा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की कंपनियों को इससे जोड़ने के लिए विभिन्न स्तरों पर संवाद शुरू किया गया।
₹5,500 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता
नई दिल्ली में आयोजित पहली निवेशक राउंडटेबल में कंपनियों की ओर से लगभग ₹3,500 करोड़ के निवेश और करीब 14 हजार रोजगार अवसरों की प्रतिबद्धता सामने आई थी।
इसके बाद 4 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में लगभग ₹2,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश का प्रस्ताव मिला। इस प्रकार ग्वालियर के प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन में कुल निवेश प्रतिबद्धता बढ़कर लगभग ₹5,500 करोड़ हो गई।
18 हजार से अधिक रोजगार अवसरों की संभावना
परियोजना से ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में 18 हजार से अधिक प्रत्यक्ष एवं संभावित रोजगार अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई गई है।
टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाइयों की स्थापना होने पर इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं, अनुसंधान, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।
प्रथम चरण में विकसित होगा 170 एकड़ का औद्योगिक क्लस्टर
ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के प्रथम चरण में लगभग 170 एकड़ भूमि पर प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
इस क्लस्टर में दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के साथ अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार से जुड़ी गतिविधियों के लिए एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। प्लग-एंड-प्ले व्यवस्था के माध्यम से निवेशकों को तैयार औद्योगिक ढांचा उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
परियोजना में मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों के लिए सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है:
- दूरसंचार उपकरणों का विनिर्माण
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
- अनुसंधान एवं विकास
- तकनीकी नवाचार
- औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक सुविधाएं
- निवेशक सहायता और साझा बुनियादी ढांचा
सिंधिया ने किया था प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण
हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में TMZ के लिए प्रस्तावित भूमि का स्थल निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने परियोजना की जमीनी स्थिति और प्रारंभिक तैयारियों की जानकारी ली थी।
स्थल निरीक्षण के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बेंगलुरु में आयोजित निवेशक राउंडटेबल में भी कंपनियों और संभावित निवेशकों से परियोजना को लेकर विस्तार से चर्चा की गई थी।
इसके बाद दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक को परियोजना की अगली कार्ययोजना तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्वालियर के विकास पर क्या असर पड़ेगा
टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के आकार लेने पर ग्वालियर को देश के प्रमुख टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में पहचान मिल सकती है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ शहर में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और औद्योगिक निवेश को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
परियोजना से छोटे एवं मध्यम उद्योगों, परिवहन, आवास, होटल, व्यावसायिक सेवाओं और स्थानीय बाजार को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, इन परिणामों का वास्तविक स्वरूप परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा
दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद अब परियोजना से जुड़े विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने, प्रस्तावित भूमि पर आवश्यक बुनियादी सुविधाएं तैयार करने और निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप कार्ययोजना लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
आने वाले समय में भूमि विकास, औद्योगिक आधारभूत संरचना, बिजली, पानी, सड़क, कनेक्टिविटी और अन्य सुविधाओं से जुड़े कार्य परियोजना की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण होंगे। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि ₹5,500 करोड़ के प्रस्तावित निवेश और 18 हजार से अधिक रोजगार की संभावनाएं कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं।

