‘बांग्लादेश का उदय’ पुस्तक विमोचन: 1971 की विजय मानवता, कूटनीति और दृढ़ नेतृत्व का ऐतिहासिक अध्याय

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बांग्लादेश का उदय पुस्तक विमोचन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी और डॉ केशव पाण्डेय

बांग्लादेश का उदय पुस्तक विमोचन समारोह ग्वालियर में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. केशव पाण्डेय की तीसरी पुस्तक ‘बांग्लादेश का उदय’ का विमोचन भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की मुख्य आतिथ्य में किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह ने की, जबकि कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थान के निदेशक डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

समारोह में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, बांग्लादेश के उदय, भारतीय सेना के शौर्य, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और डॉ. केशव पाण्डेय की पांच दशक लंबी पत्रकारिता एवं समाजसेवा यात्रा पर विस्तार से चर्चा हुई।

Contents

विषय सूची

  • ‘बांग्लादेश का उदय’ पुस्तक विमोचन कैसे हुआ?
  • जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 1971 की विजय पर क्या कहा?
  • डॉ. केशव पाण्डेय ने पुस्तक के बारे में क्या बताया?
  • कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह ने पुस्तक को क्यों बताया संग्रहणीय?
  • डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव ने क्या कहा?
  • जनरल द्विवेदी पर लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन
  • कृतिका चौहान का बनाया पोर्ट्रेट भेंट
  • 1971 का युद्ध क्यों था ऐतिहासिक?
  • इस आयोजन का बड़ा संदेश

पुष्पवर्षा और काव्य प्रस्तुति के साथ हुआ स्वागत

मुख्य अतिथि जनरल उपेंद्र द्विवेदी के मंच पर आगमन के दौरान नवनीत कौशल ने माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कविता ‘चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं’ का संगीतमय गायन प्रस्तुत किया।

भावपूर्ण प्रस्तुति के बीच आयोजन समिति की युवतियों ने पुष्पवर्षा कर जनरल द्विवेदी का अभिनंदन किया।

इसके बाद मंचासीन अतिथियों ने स्वर्गीय शीतला सहाय के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की और दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया।

1971 की विजय केवल सैन्य सफलता नहीं: जनरल उपेंद्र द्विवेदी

मुख्य अतिथि जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 1971 भारत और दक्षिण एशिया के इतिहास में निर्णायक मोड़ था।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा हुआ था। लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर भारत की ओर आना पड़ा और भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शरणार्थियों को सहायता प्रदान की।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि उस दौर में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बेहद जटिल थीं, लेकिन भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

उन्होंने भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करते हुए कहा कि सेना ने अदम्य पराक्रम का परिचय दिया।

16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के साथ बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह केवल सैन्य विजय नहीं थी, बल्कि मानवता, न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा ऐतिहासिक अध्याय था।

इतिहास हमें एकता और मजबूत नेतृत्व की सीख देता है

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास हमें बताता है कि एकता, साहस, मजबूत नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण किसी भी बड़ी चुनौती से पार पाने की शक्ति देता है।

उन्होंने देश के वीर जवानों के साहस और बलिदान को नमन किया।

अपने उद्बोधन का समापन उन्होंने ‘जय हिंद’ और ‘जय भारत’ के उद्घोष के साथ किया।

इतिहास, कूटनीति और मानवीय संघर्ष को समझने का प्रयास: डॉ. केशव पाण्डेय

पुस्तक के लेखक डॉ. केशव पाण्डेय ने स्वागत भाषण में कहा कि ‘बांग्लादेश का उदय’ केवल किसी युद्ध की कहानी नहीं है।

उन्होंने कहा कि पुस्तक में 1971 की घटनाओं को मानवीय पीड़ा, लोकतांत्रिक अधिकारों के संघर्ष, शरणार्थियों की त्रासदी, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सैन्य रणनीति और भारतीय नेतृत्व की दूरदृष्टि के संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया है।

डॉ. पाण्डेय ने बताया कि पुस्तक में ऐतिहासिक घटनाक्रम को केवल युद्ध के नजरिए से नहीं, बल्कि राजनीतिक, सामरिक, कूटनीतिक और मानवीय पहलुओं से भी प्रस्तुत किया गया है।

पांच दशक की पत्रकारिता और समाजसेवा यात्रा का किया उल्लेख

डॉ. केशव पाण्डेय ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी की उपस्थिति को अपने लिए विशेष सम्मान बताया।

उन्होंने कार्यक्रम के अध्यक्ष कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह के साथ अपने दो पीढ़ियों पुराने पारिवारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।

डॉ. पाण्डेय ने कहा कि उनकी लगभग पांच दशक लंबी पत्रकारिता और समाजसेवा यात्रा में ग्वालियर-चंबल की माटी, सहयोगियों, शुभचिंतकों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

उन्होंने उद्भव सांस्कृतिक उत्सव के माध्यम से ग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

डॉ. पाण्डेय ने विश्वास व्यक्त किया कि पुस्तक अतीत को जानने के साथ वर्तमान को समझने और भविष्य के लिए सीख लेने में भी उपयोगी सिद्ध होगी।

संग्रहणीय कृति है ‘बांग्लादेश का उदय’: कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह ने पुस्तक को महत्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति बताया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 के युद्ध ने सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद भारतीय सेना के अदम्य साहस, रणनीतिक क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को इतिहास में दर्ज किया।

उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने केवल इतिहास ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया का भूगोल भी बदल दिया।

कैप्टन सिंह ने कहा कि डॉ. केशव पाण्डेय की पुस्तक भू-राजनीति, इतिहास, सैन्य अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रुचि रखने वाले शोधार्थियों, विद्यार्थियों और पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है।

उन्होंने डॉ. पाण्डेय की पत्रकारिता, समाजसेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों की भी सराहना की।

डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव ने जनरल द्विवेदी को बताया मध्यप्रदेश की माटी का गौरव

विशिष्ट अतिथि डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी की सैन्य सेवाओं की सराहना की।

उन्होंने जनरल द्विवेदी को मध्यप्रदेश की माटी का गौरव बताते हुए उनके कार्यकाल में भारतीय सेना द्वारा शौर्य, वीरता और पराक्रम के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख किया।

डॉ. श्रीवास्तव ने डॉ. केशव पाण्डेय की लेखन क्षमता, सामाजिक सरोकारों और पांच दशक की पत्रकारिता एवं समाजसेवा यात्रा पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि निरंतर सामाजिक गतिविधियों के बीच लेखन और सृजन के लिए समय निकालना अपने आप में उल्लेखनीय है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सैन्य जीवन पर दिखाया गया लघु वृत्तचित्र

कार्यक्रम के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सैन्य जीवन और उपलब्धियों पर केंद्रित एक लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया।

उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के सचिव दीपक तोमर ने जनरल द्विवेदी के लगभग 42 वर्षों के सैन्य जीवन, महत्वपूर्ण कमान संबंधी जिम्मेदारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और तकनीकी रूपांतरण में उनके योगदान का परिचय प्रस्तुत किया।

वृत्तचित्र के माध्यम से उनके सैन्य जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को दर्शाया गया।

सामूहिक रूप से हुआ ‘बांग्लादेश का उदय’ का विमोचन

मंचासीन अतिथियों ने सामूहिक रूप से ‘बांग्लादेश का उदय’ पुस्तक का विमोचन किया।

इसके बाद सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन राम चंसौरिया ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत की और इसके ऐतिहासिक तथा सामरिक महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने पुस्तक में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश के उदय से जुड़े विभिन्न पहलुओं की प्रस्तुति को महत्वपूर्ण बताया।

कृतिका चौहान का बनाया पोर्ट्रेट जनरल द्विवेदी को भेंट

समारोह में डॉ. केशव पाण्डेय ने सुश्री कृतिका चौहान द्वारा बनाया गया जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पोर्ट्रेट उन्हें भेंट किया।

पोर्ट्रेट निर्माण में मार्गदर्शन देने वाले अंशुमान सोनी और प्रोफेसर सामंत सिंह सिंगर भी इस अवसर पर मंच पर उपस्थित रहे।

यह प्रस्तुति कार्यक्रम के विशेष आकर्षणों में शामिल रही।

अतिथियों का हुआ आत्मीय स्वागत

डॉ. केशव पाण्डेय ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी, कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह और डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव का स्वागत किया।

उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के सचिव दीपक तोमर, संयुक्त सचिव प्रवीण शर्मा, कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल, किशन मुद्गल, वरिष्ठ पत्रकार टी.एन. मनीष और उद्भव के क्रिएटिव हेड अक्षत तोमर ने भी जनरल द्विवेदी का अभिनंदन किया।

श्रीमती किरण भदौरिया और प्रो. राजरानी शर्मा ने जनरल द्विवेदी का स्वागत किया।

संतोष वशिष्ठ और जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य प्रदीप शर्मा ने कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह का अभिनंदन किया, जबकि देवेंद्र अहिरवार और भूपेंद्रकांत ने डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव का स्वागत किया।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर मीडिया एक्सीलेंस के सदस्यों ने भी अतिथियों का स्वागत किया और सभी मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।

साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियां रहीं मौजूद

समारोह में साहित्य, कला, पत्रकारिता, शोध, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इनमें सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी.एम. शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश सम्राट, साहित्यकार महेश कटारे, डॉ. गुंजन श्रीवास्तव, किशन मुद्गल, श्रीमती किरण भदौरिया और प्रो. राजरानी शर्मा सहित अनेक प्रमुख नाम शामिल रहे।

सभागार में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों, बुद्धिजीवियों, साहित्य प्रेमियों और डॉ. केशव पाण्डेय के शुभचिंतकों ने उनकी तीसरी कृति के लिए उन्हें बधाई दी।

आभार और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का संचालन श्याम सुंदर ओझा ने किया।

समारोह के अंत में उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के संयुक्त सचिव प्रवीण शर्मा ने मुख्य अतिथि जनरल उपेंद्र द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव, अध्यक्ष कैप्टन वीरेश प्रताप सिंह और उपस्थित गणमान्य नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने आयोजन की सफलता में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वाले सभी सहयोगियों को भी धन्यवाद दिया।

राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

1971 — एक युद्ध, जिसने दक्षिण एशिया का इतिहास बदल दिया

1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध दक्षिण एशिया के इतिहास की निर्णायक घटनाओं में शामिल है।

पूर्वी पाकिस्तान में पैदा हुए मानवीय संकट और बड़ी संख्या में शरणार्थियों के भारत आने से परिस्थितियां बेहद गंभीर हो गई थीं।

भारतीय सेना के पराक्रम, रणनीतिक नेतृत्व और तत्कालीन राजनीतिक निर्णयों ने युद्ध की दिशा बदल दी।

16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के साथ बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

डॉ. केशव पाण्डेय की पुस्तक ‘बांग्लादेश का उदय’ इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम को सैन्य, कूटनीतिक, राजनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करती है।

इस आयोजन का बड़ा संदेश

बांग्लादेश का उदय पुस्तक विमोचन केवल किसी नई पुस्तक के प्रकाशन का अवसर नहीं रहा, बल्कि 1971 के युद्ध, भारतीय सेना के शौर्य, मानवीय मूल्यों और भारत की रणनीतिक भूमिका को नई पीढ़ी के सामने रखने का मंच भी बना।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह रेखांकित किया कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का विवरण नहीं है। वह वर्तमान को समझने और भविष्य के निर्णयों के लिए सीख भी देता है।

डॉ. केशव पाण्डेय की पुस्तक इसी ऐतिहासिक विमर्श को दस्तावेज के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास है।

आगे की दिशा

अब पुस्तक का वास्तविक मूल्य पाठकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों तक पहुंचने में होगा।

1971 के युद्ध और बांग्लादेश के गठन को सैन्य विजय तक सीमित न रखकर उसके मानवीय, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं को समझना भी महत्वपूर्ण है।

ऐसी कृतियां नई पीढ़ी को भारत के इतिहास, विदेश नीति, सैन्य रणनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों के व्यापक संदर्भ से परिचित कराने में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।

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