भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक और गर्व का क्षण सामने आया है। नीरज घेवान के निर्देशन में बनी फिल्म ‘होमबाउंड’ ने 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स 2026 में बड़ा मुकाम हासिल किया है। यह फिल्म भारत की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी की टॉप-15 शॉर्टलिस्टेड फिल्मों में जगह बनाने में सफल रही है।
एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की ओर से कुल 12 कैटेगरी की शॉर्टलिस्ट जारी की गई है, जिसमें ‘होमबाउंड’ का नाम शामिल होना भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस कैटेगरी में दुनिया के 86 देशों की फिल्में शामिल थीं, लेकिन कड़े और बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल 15 फिल्मों को ही आगे बढ़ने का मौका मिला।
इन इंटरनेशनल फिल्मों से होगा ‘होमबाउंड’ का मुकाबला
ऑस्कर 2026 की इस अहम रेस में ‘होमबाउंड’ का सामना कई मजबूत और चर्चित इंटरनेशनल फिल्मों से होगा। इनमें अर्जेंटीना की ‘बेलेन’, ब्राजील की ‘द सीक्रेट एजेंट’, फ्रांस की ‘इट वॉज जस्ट ऐन ऐक्सिडेंट’, जर्मनी की ‘साउंड ऑफ फॉलिंग’, जापान की ‘कोकुहो’ और साउथ कोरिया की ‘नो अदर चॉइस’ जैसी दमदार फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों को वैश्विक स्तर पर क्रिटिक्स और दर्शकों से जबरदस्त सराहना मिली है।
दोस्ती, संघर्ष और सामाजिक सच्चाइयों की कहानी है ‘होमबाउंड’
‘होमबाउंड’ उत्तर भारत के एक गांव में रहने वाले दो बचपन के दोस्तों चंदन और शोएब की कहानी है। दोनों का सपना पुलिस परीक्षा पास कर सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने का होता है, लेकिन सामाजिक असमानता, जाति और धर्म से जुड़े मुद्दे उनकी दोस्ती और सपनों के बीच खड़े हो जाते हैं।
फिल्म की कहानी कोविड-19 महामारी के दौरान मजदूरों और आम लोगों की घर वापसी से प्रेरित है और इसे न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक चर्चित राइट-अप से आधार मिला है। यह फिल्म गरीबी, भेदभाव, बेरोज़गारी और मानवीय संघर्ष जैसे विषयों को संवेदनशील और प्रभावशाली अंदाज़ में दर्शाती है।
दमदार स्टारकास्ट और मजबूत प्रोडक्शन
फिल्म में ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। ‘होमबाउंड’ को करण जौहर ने प्रोड्यूस किया है, जबकि नीरज घेवान का निर्देशन फिल्म को एक गहराई और विश्वसनीयता प्रदान करता है।
ऑस्कर की शॉर्टलिस्ट तक पहुंचने से पहले यह फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल और टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी दिखाई जा चुकी है, जहां इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी।
क्या टूटेगा 24 साल का इंतजार?
अब अगला चरण और भी अहम है। एकेडमी के सदस्य इन 15 शॉर्टलिस्टेड फिल्मों को देखने के बाद फाइनल नॉमिनेशन के लिए वोट करेंगे। भारत को आखिरी बार ‘लगान’ (2001) में ऑस्कर नॉमिनेशन मिला था। इससे पहले ‘सलाम बॉम्बे’ (1988) और ‘मदर इंडिया’ (1957) ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘होमबाउंड’ 24 साल बाद भारत को एक बार फिर ऑस्कर नॉमिनेशन तक पहुंचा पाएगी। फिलहाल इतना तय है कि इस फिल्म की शॉर्टलिस्ट में मौजूदगी ही भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान और बढ़ते कद का बड़ा प्रमाण है।