मां चली गई लेकिन उसकी यादें यही रह गई: डेढ़ माह बाद भी इंतजार है– मां लेने जरूर आएगी

Picture of By: Sandhya Samachar Team

By: Sandhya Samachar Team

Share

मां चली गई लेकिन उसकी यादें यही रह गई: डेढ़ माह बाद भी इंतजार है– मां लेने जरूर आएगी

बीते डेढ़ माह पहले ग्वालियर के टोपी बाजार इलाके से एक आंखे नम करने वाला मामला सामने आया था। इस खबर को जिस किसी ने भी सुना, स्वयं देखा, या अखबारों में पढ़ा यक़ीनन उसकी आँखें भर आईं होंगी।

यह मामला जुड़ा है (70) वर्षीय रिटायर्ड क्लर्क उर्मिला भदौरिया की मौत का जिनके जाने के बाद एक गमगीन करने वाली कहानी सामने आई है। यह बात हो रही है उर्मिला के मानसिक रूप से कमजोर (40) वर्षीय बेटे अखंड और (38) वर्षीय बहन रितु की जो मां के गुजर जाने के बाद भी उसके मृत शरीर के साथ ऐसे बैठे रहे जैसे सब सामान्य हो।


उर्मिला देवी की मृत्यु 14 फरवरी की रात हो गई थी, लेकिन मानसिक रूप से पीड़ित बेटा–बेटी इससे समझ ही ना सके। 5 दिन बीतने के बाद शव सड़ना शुरू हो गया और उसमें कीड़े पड़ने लगे, तब उसकी बदबू घर के बाहर तक फैली और पड़ोसियों को शक हुआ। पड़ोसियों ने तत्काल पुलिस को सूचित किया, पुलिस के आने के बाद शव को बरामद कर कार्रवाई शुरू हुई।

पुलिस ने भी बीमारी का हवाला दे कर शव को बाहर किया


पुलिस ने उन दोनों की मानसिक स्थिति को देखते हुए उनकी मां के शव को झूठ बोलकर उठाया के वहां बीमार हो गई है इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहें है, और यही बात इन मासूम पीड़ितों के मन में घर कर गई। एक दिन बीता ही था और यह दोनों अपनी मां के तलाश में घर के बाहर निकल गए और उन्हें ढूंढते हुए कोतवाली पहुंच गए। इसके बाद जब पुलिस ने उनसे पूछा तो अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बोले ‘हमारी मां खो गई है, कही मिल नहीं रही है, आप ढूंढ दो’। मानसिक रूप से पीड़ित बेटा-बेटी अंजान हैं कि उनकी मां इस दुनिया को अलविदा कह चुकी है।

Also Read


तकरीबन एक महीने से दोनों भाई – बहन स्वर्ग सदन आश्रम में रह रहे है और दिन भर अपनी मां का इंतजार करते है, अपनी मां को लेके इनकी एक ही आस है मां कब आएगी, कभी दरवाजे पर बैठ के इंतजार करते है तो कभी आश्रम के लोगो से पूछते है ‘मां कब आएगी?’
जब कई बार सवाल करने पर जवाब के तौर पर उन्हें बताया गया की उनकी मां इस दुनिया से जा चुकी है, तो उन्होंने इस बात को नकार दिया और कहा “मां बीमार है, अस्पताल गई है, हमें लेने जरूर आएगी”।

मां ही थी दोनों की पूरी दुनिया


पड़ोसियों के मुताबिक दोनों भाई–बहन महीनों तक घर के बाहर नहीं निकलते थे, उनकी देखभाल का जिम्मा उनकी मां का ही था। उर्मिला देवी के पति के निधन के बाद उन्होंने अकेले हे दोनों बच्चों को पढ़ाया लिखाया, लड़का बी– टेक और लड़की साइंस ग्रेजुएट है। अपने बच्चों की इस मानसिक बीमारी के कारण उर्मिला ने समाज, रिश्तेदार, और बाहरी दुनिया से दूरी बना ली थी। इनका दो कमरों का घर ही उनका पूरा संसार बन चुका था, अकेली बुजुर्ग उर्मिला देवी घर कि साफ सफाई भी नियमित रूप से नहीं कर पाती थी उनके घर की छत पर सालों से कचरा जमा हो रहा है।

अब पुलिस और आश्रम कर रहे है काउंसलिंग


इन दोनों की दिमागी स्थिति को देखते हुए पुलिस ने दोनों को स्वर्ग सदन आश्रम में भर्ती करवाया, जहां उनकी काउंसलिंग कि जा रही है, लेकिन वह दोनों इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे है की उनकी मां अब जा चुकी है।
आश्रम प्रबंधन के अनुसार, दोनों बच्चे बार–बार अपने घर जाने के जिद और अपने मां से मिलने की बात करते है। ऐसे में उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए धीमी गति से काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें सच्चाई से रूबरू कराने के कोशिश जारी है।

Top Stories
Related Post