भारत में बहुत जल्द हाइड्रोजन ट्रेन पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी। रेलवे का यह प्रोजेक्ट अब आखिरी चरण में पहुंच गया है। जल्द ही इसका ट्रायल रन शुरू होगा। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। पायलट फेज में यह ट्रेन हरियाणा में जिंद से सोनीपत के बीच चलाई जाएगी। यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी ब्राॅडगेज हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक होगी। इसमें कुल 10 कोच होंगे, जिनमें दो ड्राइविंग पावर कार और 8 पैसेंजर कोच शामिल हैं।सभी कोच चेन्नई स्थित आईसीएफ में पूरी तरह देश में ही डिजाइन कर बनाए गए हैं।
जर्मनी और चीन में पहले से हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं, लेकिन भारत की यह ट्रेन ब्राॅडगेज (5 फीट 6 इंच पर) बनी सबसे लंबी ट्रेन है। साफ कहें तो दो पावर कार से कुल 2,400 केवी के पावर के साथ यह दुनिया की सबसे ताकतवर ट्रेनों में से एक मानी जा रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन से चलेगी ट्रेन
इस ट्रेन के लिए जिंद में बने आधुनिक हाइड्रोजन प्लांट से आएगा।इस प्लांट की स्टोरेज क्षमता 3,000 किलो है और इसमें पानी से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए हाइड्रोजन बनाई जाती है। अधिकारियों ने बताया कि प्लांट को बिना रुकावट चलाने के लिए 11 केवी की स्थिर बिजली सप्लाई सुनिश्चित की गई है।
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए मजबूत बैकअप सिस्टम और तेज रिस्पॉन्स व्यवस्था पर जोर दिया है ताकि संचालन सुचारु रहे।
पिछले महीने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा को बताया था कि भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट रिसर्च डिजाइन और स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन के मानकों अनुसार किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी बयानों के मुताबिक 26 जनवरी 2026 को ट्रायल शुरू होन की संभावना है। इस पायलट प्रोजेक्ट के साथ भारत चुनिंदा उन देशों में शामिल हो जाएगा जो हाइड्रोजन से चलने वाली रेल तकनीक पर काम कर रहे हैं। दुनिया की कई हाइड्रोजन ट्रेनों के मुकाबले इस प्रोजेक्ट में डीजल मल्टीपल यूनिट को हाइड्रोजन तकनीक से बदला गया है, जो भारत की स्वदेशी इंजीनियरिंग क्षमता को दिखाता है।