पत्नी से खर्चे का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं

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पत्नी से खर्चे का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम  फैसले में कहा है कि अगर पति घर के पैसों के फैसले खुद करता है या पत्नी से खर्च का हिसाब  पूछता है तो इसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता। खासकर जब तक इससे पत्नी को कोई  गंभीर  मानसिक या शारीरिक नुकसान  साबित  नहीं हो।

जस्टिस बीवी नागरता और जस्टिस आर महादेवन की बेंच  ने यह टिप्पणी दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के एक मामले को रद्द करते हुए की। इस केस में पत्नी ने पति पर आरोप  लगाया था कि वह घर के एक-एक पैसे का हिसाब एक्सेल शीट में रखने को मजबूर  करता था। बेंच  ने कहा कि यह स्थिति भारतीय  समाज की एक हकीकत  को दर्शाती है, जहां कई  घरों में पुरुष  आर्थिक  जिम्मेदारी अपने हाथ में रखते हैं, लेकिन  इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

तेलंगाना में एक  पति-पत्नी के बीच  लंबे समय से अनबन चल रही थी। पत्नी ने पति और उसके परिवार पर क्रूरता और  दहेज  उत्पीड़न  का आरोप  लगाते हुए मार्च?2023 में एफआईआर दर्ज  करा दी। महिला का कहना था कि पति घर के पैसों का पूरा नियंत्रण रखता था, उससे खर्चों का हिसाब  मांगता था और घर के दीगर फैसलों में भी उसे बोलने का मौका नहीं देता था। इसी आधार पर उसने आपराधिक  केस कर दिया। यह मामला अप्रैल 2023 में तेलंगाना हाईकोर्ट  गया, जहां हाईकोर्ट ने एफआईआर  रद्द करने से इंकार  कर दिया। इसके बाद पति सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर पति को बड़ी राहत दे दी कि पत्नी से खर्चे का हिसाब  मांगना क्रूरता नहीं है।

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