गुना जिले के बमोरी विकासखंड स्थित सांगई स्कूल के नए भवन ने विद्यार्थियों की पढ़ाई की तस्वीर बदल दी है। कभी जर्जर भवन के कारण तिरपाल से बने अस्थायी टपरे में पढ़ने को मजबूर बच्चों को अब सुरक्षित और व्यवस्थित विद्यालय भवन मिल गया है।
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री तथा गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने गुना प्रवास के दौरान ग्राम सांगई स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय, मारकी महू का भ्रमण किया। उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक एवं मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण करने के साथ विद्यार्थियों और शिक्षिकाओं से संवाद किया।
विषय सूची
- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया विद्यालय का निरीक्षण
- जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर थे विद्यार्थी
- जुलाई 2025 में सिंधिया ने लिया था संज्ञान
- अप्रैल 2026 में पूरा हुआ नया भवन
- सांगई स्कूल में उपलब्ध सुविधाएं
- विद्यार्थियों के साथ बिताए आत्मीय पल
- बच्चों के भविष्य के लिए क्या मायने
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया सांगई स्कूल का निरीक्षण
विद्यालय भ्रमण के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कक्षाओं, पेयजल व्यवस्था, फर्नीचर और परिसर में उपलब्ध दूसरी सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, विद्यालय के वातावरण और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों के बारे में जानकारी ली।
सिंधिया ने बच्चों के साथ समय बिताते हुए उनका उत्साह बढ़ाया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान विद्यालय की शिक्षिकाएं, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे।
जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर थे विद्यार्थी
सांगई स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय का पुराना भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में था। छत से प्लास्टर गिरने और बारिश के दौरान भवन में पानी भरने के कारण यहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करना सुरक्षित नहीं रह गया था।
ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई तिरपाल से तैयार किए गए अस्थायी टपरे में कराई जा रही थी। गर्मी, बारिश और बदलते मौसम के बीच बच्चों को असुविधाजनक वातावरण में बैठकर पढ़ना पड़ता था। विद्यालय की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही थी।
जुलाई 2025 में सिंधिया ने लिया था संज्ञान
विद्यालय की बदहाल स्थिति की जानकारी मिलने के बाद जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मामले का संज्ञान लिया था। उस समय वह बेंगलुरु प्रवास पर थे। वहीं से उन्होंने गुना कलेक्टर से फोन पर चर्चा कर विद्यालय भवन का निर्माण शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को जर्जर भवन और अस्थायी टपरे से निकालकर सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना था। निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
अप्रैल 2026 में पूरा हुआ नया विद्यालय भवन
प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अप्रैल 2026 में नया विद्यालय भवन तैयार हो गया। इससे विद्यार्थियों को स्थायी कक्षाओं में पढ़ने की सुविधा मिलने लगी।
वर्तमान में विद्यालय में कुल 34 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां दो शिक्षिकाएं पदस्थ हैं। विद्यालय में दो अध्यापन कक्ष उपलब्ध हैं, जिनमें व्यवस्थित रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
सांगई स्कूल के नए भवन में उपलब्ध सुविधाएं
नए भवन के साथ विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा से संबंधित कई आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- दो व्यवस्थित अध्यापन कक्ष
- सभी विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर
- विद्यालय परिसर के चारों ओर बाउंड्रीवॉल
- पर्याप्त एवं सुचारु पेयजल व्यवस्था
- विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकों का वितरण
- गतिविधि आधारित शिक्षण सामग्री
- दो शिक्षिकाओं की उपलब्धता
बच्चों के लिए पढ़ाई को रोचक और आनंददायक बनाने के उद्देश्य से विद्यालय में ‘जादुई पिटारा’ जैसी शैक्षणिक सामग्री का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके माध्यम से गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विद्यार्थियों के साथ बिताए आत्मीय पल
विद्यालय पहुंचे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बच्चों से उनकी कक्षा, पढ़ाई और पसंदीदा विषयों के बारे में बातचीत की। उन्होंने विद्यालय की शिक्षिकाओं से भी शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान सिंधिया बच्चों के बीच सहज नजर आए। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
बच्चों के भविष्य के लिए क्या मायने
नए विद्यालय भवन के निर्माण से सांगई के बच्चों को सुरक्षित, स्थायी और सुविधाजनक वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है। पहले जहां बारिश और जर्जर भवन के कारण पढ़ाई प्रभावित होती थी, वहीं अब विद्यार्थियों को कक्षाओं, फर्नीचर, पेयजल और शैक्षणिक सामग्री जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के महत्व को भी रेखांकित करता है। विद्यालय भवन तैयार होने के बाद अब बच्चों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

