तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में प्रतिष्ठा की जंग, बांकीपुर और मंजलपुर के नतीजों पर भी टिकी नजर

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दतिया उपचुनाव में 71.44% मतदान, भाजपा के टिकट बदलाव से गरमाई सियासत; बांकीपुर और मंजलपुर में भी मतदान संपन्न, 3 अगस्त को होगी मतगणना

मध्य प्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। तीनों सीटों पर मतदान के बाद अब उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद है और सभी की नजरें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। इन तीनों सीटों में सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट को लेकर रही, जहां मुकाबला प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

दतिया उपचुनाव में 71.44 प्रतिशत मतदान

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए कुल 2,20,410 मतदाताओं के लिए 291 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मतदान के दौरान मतदाताओं ने उत्साह दिखाया, हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया क्षेत्र में 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था, जबकि इस उपचुनाव में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान में आई इस गिरावट को चुनावी नतीजों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना बना बड़ा चुनावी मुद्दा

दतिया उपचुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के उम्मीदवार चयन को लेकर हुई। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा।

टिकट में बदलाव के बाद भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। विरोध-प्रदर्शन से लेकर पुलिस कार्रवाई तक की घटनाओं ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया। इस बीच डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा को अपनी “मां” बताते हुए कार्यकर्ताओं से पार्टी के पक्ष में एकजुट रहने की अपील की। इसके बाद भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर चुनाव प्रचार को और तेज किया।

भाजपा ने झोंकी ताकत, कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर लगाया दांव

दतिया में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार किया। भाजपा ने सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंकी।

दूसरी ओर कांग्रेस ने दतिया राजपरिवार से आने वाले घनश्याम सिंह के समर्थन में चुनावी अभियान चलाया। मतदान के दौरान कांग्रेस की ओर से जिगना क्षेत्र में फर्जी मतदान के आरोप भी लगाए गए।

वहीं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं पर अपना फोकस बनाए रखा। इससे दतिया का चुनावी समीकरण और दिलचस्प हो गया।

दतिया में मतदाता की खामोशी ने बढ़ाया सस्पेंस

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, लेकिन मतदाताओं ने अपने रुख को लेकर ज्यादा संकेत नहीं दिए। मतदान के बाद भी यह स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल है कि दतिया में किस राजनीतिक दल को बढ़त मिल सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक दतिया में मुकाबला कड़ा हो सकता है और अंतिम परिणाम बेहद दिलचस्प रहने की संभावना है। खास तौर पर मतदान प्रतिशत में आई गिरावट और भाजपा के भीतर टिकट को लेकर सामने आई शुरुआती नाराजगी के चुनावी प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।

बांकीपुर में अपेक्षा से कम मतदान

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भी 30 जुलाई को मतदान हुआ। भाजपा नेता नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। यहां अपेक्षा के मुकाबले कम मतदान दर्ज होने के बाद राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर वोटिंग पैटर्न का आकलन कर रहे हैं।

बांकीपुर के नतीजे को बिहार की राजनीति के साथ ही भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुजरात की मंजलपुर सीट पर शांतिपूर्ण मतदान

गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भी मतदान शांतिपूर्ण रहा। यहां भी मतदान समाप्त होने के साथ प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य ईवीएम में कैद हो गया है।

अब गुजरात में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों की निगाहें मतगणना पर हैं। उपचुनाव का परिणाम राज्य में राजनीतिक दलों के जनाधार और आगामी रणनीतियों के लिहाज से अहम संकेत दे सकता है।

3 अगस्त को आएंगे उपचुनाव के नतीजे

दतिया, बांकीपुर और मंजलपुर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना 3 अगस्त को होगी। नतीजे केवल तीन विधानसभा क्षेत्रों के नए प्रतिनिधि तय नहीं करेंगे, बल्कि संबंधित राज्यों में प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति और जनसमर्थन की परीक्षा के रूप में भी देखे जाएंगे।

सबसे ज्यादा नजर दतिया पर रहने वाली है, जहां उम्मीदवार चयन से लेकर मतदान तक कई राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिले। अब मतदाताओं का फैसला किसके पक्ष में जाता है, इसका खुलासा मतगणना के साथ होगा।

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