हाल ही में इजरायल – अमेरिका और ईरान युद्ध विराम घोषित हुआ था जिसकी मध्यस्थता खुद पाकिस्तान ने आगे बढ़कर की थी हालांकि इस समझौते में खुद अमेरिका या ईरान शामिल नहीं हुआ था। दोनों ही देशों के प्रतिनिधियों को पाकिस्तान के द्वारा सूचित किया जा रहा था की युद्ध विराम में क्या–क्या शर्तें रखी जा रही हैं। इस युद्ध विराम की कोई आधिकारिक सूचना किसी भी देश के द्वारा प्रकाशित भी की गई थी, बावजूद इसके सोशल मीडिया पर इसका जश्न मनाया जा रहा था, अपनी इच्छा अनुसार लोग दोनों देशों की प्रशंसा और आलोचना कर रहे थे।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान
इजराइल बुराई का प्रतीक है और और मानवता के लिए अभिशाप है। इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, वहीं लेबनान में नरसंहार हो रहा है। इजरायल निर्दोष को मार रहा है, पहले गाजा में, फिर ईरान में और लेबनान में। मेरी दुआ है कि जिन लोगों ने इस देश को बनाया वे नरक में जलें।
वही इजरायल के पीएम ऑफिस ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री आसिफ के इस बयान को आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा यह बयान इजरायल को खत्म करने के जैसा है, इसको स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर उस देश जो खुद को शांति वार्ता का मध्यस्थ बता रहा है। इजरायल की इस प्रतिक्रिया के बाद ख्वाजा आसिफ ने यह पोस्ट डिलीट कर दी।
सीजफायर का हुआ उल्लंघन
48 घंटे पूरे हुए भी नहीं थे युद्ध विराम के कि तभी इजरायल के तरफ से लेबनान में भारी गोलाबारी शुरू कर दी गई जिसकी कीमत कई मासूमों ने अपनी जान गवा कर चुकाई। ईरान से इस गोलाबारी से भड़क गया और हार्मोज स्ट्रेट पर लगे प्रतिबंधों को जारी रखा, जिसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मीडिया प्रवक्ता कैरोलिन लेविट और उप राष्ट्रपति जेडी वेनस ने स्पष्ट कर दिया कि इस समझौते में लेबनान को लेकर कोई बात नहीं हुई थी और हमारा लेबनान के हमलों से कोई लेना देना नहीं है।