मध्य प्रदेश सरकार अपने देसी अनाज जैसे सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैगनी अरहर को GI टैग दिलाने की तैयारी कर रही है अगर इन अनाजों को GI टैग मिल जाता है, तो इसका मतलब यह है कि यह फसल दुनिया भर में एमपी की ब्रांड बन जाएगी।
सरकार ने इन अनाजों पर GI टैग मंजूर करने के लिए जबलपुर के कृषि यूनिवर्सिटी से दस्तावेज तैयार करवाए हैं और उन दस्तावेजों को चेन्नई के GI ऑफिस भेज दिया है। दस्तावेज तो तो चेन्नई के GI ऑफिस पहुंच चुके हैं लेकिन अभी अप्रूवल नहीं मिला है और ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही इन अनाजों पर GI टैग मिल जाएगा।
कहां उगते यह अनाज ?
यह अनाज पहाड़ी इलाकों डिंडोरी, मंडल जैसे शहरों में उगते हैं गौरतलब हैं कि सीताही कुटकी सिर्फ 2 महीने में ही पूरी तरीके से तैयार हो जाती है, नागदमन कुटकी की बात करें तो यह लोगों के लिए मानो औषधी का काम करती है। और आखिर में बैगनी अरहर की बात करें तो यह प्रोटीन से भरपूर बैगनी रंग की होती है लेकिन किसानों को बैगनी अरहर उगाने में सालों लग जाते हैं। किसानों के लिय खेती मानो मेहनत और कमाई का एकतरफा सहारा होती है।
GI टैग होता क्या है?
GI टैग मतलब ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग, यह टैग एक खास प्रमाण- पत्र होता हैं। जो किसी भी चीज या उत्पाद को उसके मूल स्थान की पहचान दिलाता है और भारत मेंचेन्नई की GI रजिस्ट्री ही यह टैग या प्रमाण- पत्र देती हैं।