“ग्वालियर साहित्य संस्थान ” का नवगीत दिवस समारोह हुआ सम्पन्न।

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"ग्वालियर साहित्य संस्थान " का नवगीत दिवस समारोह हुआ सम्पन्न।

ग्वालियर। ग्वालियर साहित्य संस्थान एवं” लोकमंगल” पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में 5 फरवरी गुरुगवार के पड़ाव स्थित प्रवीणा पाण्डेय मेमोरियल आईकॉम मीडिया सेंटर में नवगीत व काव्य संध्या का आयोजन किया गया , जिसमें नवगीतकार बृजेश चंद्र श्रीवास्तव का सम्मान एवं काव्य परिचर्चा व काव्य संध्या का हुई ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. केशव पाण्डेय ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. बृजेश शर्मा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजरानी शर्मा, डॉ. श्रद्धा सक्सेना मंचासीन रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती का पूजा चंदन से किया गया, जिसके पश्चात् अतिथियों का स्वागत सम्मान पुष्पहार एवं शाॅल श्रीफल भेंटकर किया गया। कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ भगवान स्वरूप चैतन्य ने किया जिसमें नवगीतों के सृजन के संदर्भ में उन्होंने विस्तृत सारगर्वित उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवियत्री कादंबरी आर्य ने किया।

इसके पक्ष विशेष अतिथि के रूप में श्रद्धा सक्सेना ने नवगीतों के प्रभाव, लालित्य और भाव संप्रेषण पर अपनी बात कहते हुए गीतों का मूल स्वरूप प्रकट किया। उन्होंने कहा नवगीत कोमल भावों का वह प्रवाह है जो श्रोता के अंतस् में अद्भुत रूप से प्रभाव डालता है।
कार्यक्रम की सारस्वत अतिथि डॉ राज रानी शर्मा ने गीतों पर अपना उद्बोधन देते हुए कहा ” नवगीत मन के सौंदर्य को पढ़ने एवं एहसास करने में माधुर्य का अद्भुत सृजन है मन को झंकृत करता है एवं लालित्य का हमारे अंतस् में एहसास कराता है।

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साथ ही मुख्य अतिथि डॉ बृजेश शर्मा ने नवगीत के इतिहास एवं परंपरा और उसके सृजन पर बोलते हुए कहा नवगीत 75 वर्ष पूर्ण होने पर गीत के स्वरुप के बारे में बात की, जिसमें भावना, व्यंजना एवं शब्दों के सही संयोजन के साथ का होना आवश्यक है।

इसके पश्चात् अध्यक्षता कर रहे डॉ. केशव पांडेय ने नवगीतों पर विशेष जोर देते हुए ग्वालियर को गीतों का सृजनधर्मी शहर बताया एवं अपने संघर्ष की स्थिति को आज की वर्तमान परिस्थितियों में सुखद अनुभूति करते हुए सबको प्रेरित किया।

इसके पश्चात् काव्य एवं गीतों का क्रम चला जिसमें राम अवतार रास, प्रदीप कुमार पुष्पेंद्र,डॉ ललित मोहन त्रिवेदी एवं बृजेश चंद्र श्रीवास्तव द्वारा नवगीत सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इसी के साथ भी उनको नवगीतकार राष्ट्रीय नवगीतकार “के रूप में शाॅल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र आदि से सम्मानित किया गया। इसी के साथ ग्वालियर के नवगीत पर प्रथम पीएचडी एवं मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर बृजेश शर्मा का शाॅल, श्रीफल एवं सम्मान पत्र से सम्मानित कियागया डॉ. मधुलिका सिंह एवं मांगीलाल मरमिट ने काव्य पाठ किया।
इसी क्रम में “दिव्यता की मंजुल दीपिका माया वर्मा साहित्यावलोकन” पुस्तक लेखिका डॉ. श्रद्धा सक्सेना की पुस्तक का लोकार्पण किया गया। अगले क्रम में कार्यक्रम संयोजक डॉ बृजेंद्र गुर्जर का भी शाॅल श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया व अंत मेंउपस्थितगणमान्यजनों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉक्टर महेश कटारे, डॉ सुरेश सम्राट, मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा से कवि रामचरण रुचिर, दिलीप मिश्रा, राजेश अवस्थी लावा, रोशन मनीष, डॉ लाल जी,डॉ अमित शर्मा महासमर सहित अनेक साहित्यकार एवं गनमंजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार प्रदर्शन प्रवीण कमठान ने किया।

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