कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में रविवार को एक अनोखा और भव्य आयोजन देखने को मिला, जहां लाखों लोगों ने सामूहिक रूप से भगवद् गीता का पाठ कर नया रिकॉर्ड बना दिया। सनातन संस्कृति संसद, जो विभिन्न मठों और आध्यात्मिक गुरुओं का संगठन है इस कार्यक्रम का उद्देश्य गीता के सार्वभौमिक संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाना और सनातन धर्म की मूल भावना को मजबूत करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने दावा किया कि पांच लाख से अधिक लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। साधु-संतों, साध्वियों, नेपाल और बांग्लादेश से आए भक्तों ने भी गीता पाठ में भाग लेकर आयोजन को वैश्विक स्वरूप दिया। वेद मंत्रोच्चार के बाद गीता के प्रथम, नवम और 18वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया गया। पूरा ब्रिगेड मैदान भगवा पताकाओं से सजा नजर आया और श्रद्धालु ढाक-झांझ की ताल पर नृत्य करते दिखे। शंख की ध्वनि से पूरा परिसर गूंज उठा। स्वामी ज्ञानानंद जी रथ पर गीता लेकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जो एक आध्यात्मिक शोभायात्रा की तरह प्रतीत हुआ।
ये बदलते बंगाल की आहट है…
— Deepak Sharma (@SonOfBharat7) December 7, 2025
ये बंगाल के आने वाले कल का संकेत है…🔥
कलकत्ता के ब्रिगेड ग्राउंड में गीता पाठ के लिए
5 लाख से ज़्यादा हिंदू एकत्र हुये और एक स्वर में गीता पाठ किया….
जागो बंगाल जागो ✊ pic.twitter.com/sqTg946T2h
मंच से संबोधित करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अगर हिंदू एकजुट हो जाएं, तो भारत को हिंदू राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा “यह देश बाबर का नहीं, रघुवर का है। भारत में हमें सनातनी चाहिए, तनातनी नहीं। भगवा-ए-हिंद चाहिए, गजवा-ए-हिंद नहीं।” उन्होंने सामूहिक गीता पाठ को सनातन एकता और विश्व-शांति का माध्यम बताया।
इस आयोजन का समय उस वक्त चर्चा में आया, जब एक दिन पहले टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी। चुनावी माहौल के बीच कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हुआ। टीएमसी ने भाजपा पर धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाया, हालांकि आयोजकों ने इसे आध्यात्मिक कार्यक्रम बताते हुए किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से इनकार किया।
धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि मां काली की पवित्र धरती कोलकाता में पांच लाख से अधिक लोगों को एक साथ गीता पाठ करते देख ऐसा महसूस हुआ मानो यहां महाकुंभ का आयोजन हो। उन्होंने गीता को भारत की शान और स्वाभिमान बताते हुए जल्द ही बंगाल में फिर कथा करने का ऐलान किया।