सोने की कीमतें इस समय ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी हैं, और सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2026 में सोना महंगा होगा या सस्ता। भारत में पिछले कुछ महीनों में गोल्ड रेट तेजी से बढ़े हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों में चिंता बढ़ गई है। 10 ग्राम सोना जहां पहले 1.23 लाख था, वहीं अब 1.30 लाख रुपये तक पहुंच गया है। यह लगातार बढ़ता भाव घरेलू बजट पर भारी पड़ रहा है, जबकि निवेशकों के लिए यह मजबूती फायदेमंद साबित हो रही है। MCX पर भी सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया और 1,30,641 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड किया। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट ने भी भारत में गोल्ड को और महंगा कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत बना हुआ है। स्पॉट गोल्ड 4207 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा और अमेरिकी फ्यूचर में भी बढ़त दर्ज हुई। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, और अक्टूबर में 53 टन गोल्ड की खरीद ने इस साल का सबसे बड़ा आंकड़ा दर्ज किया। इससे वैश्विक स्तर पर गोल्ड की डिमांड और बढ़ गई है।
बाबा वेंगा की भविष्यवाणी
इसी बीच 2026 को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हैं, जहां दावा किया जा रहा है कि बाबा वेंगा ने 2026 में एक बड़े आर्थिक संकट की भविष्यवाणी की थी। कहा जा रहा है कि यह कैश बुकिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और ऐसे माहौल में लोग सुरक्षित निवेश के रूप में गोल्ड की ओर रुख करेंगे। इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसकी चर्चा ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है। वायरल अनुमानों के मुताबिक, 2026 तक गोल्ड की कीमतें 25 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जिससे भारत में 10 ग्राम सोना 1.63 लाख से 1.82 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
Deutsche Bank की नई रिपोर्ट भी गोल्ड के बड़े उछाल की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक गोल्ड 5000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। इसके पीछे सेंट्रल बैंकों की भारी खरीद, वैश्विक सप्लाई की कमी और निवेशकों का बढ़ता भरोसा मुख्य कारण बताए गए हैं। अगर ग्लोबल मार्केट में ऐसी स्थिति बनती है, तो भारत में भी गोल्ड की कीमतें नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
हालांकि सोना हमेशा से मुश्किल समय में सुरक्षित निवेश माना गया है, लेकिन सिर्फ भविष्यवाणियों पर निर्भर रहना सही नहीं है। बाजार की स्थिति, आर्थिक परिस्थितियों और व्यक्तिगत निवेश रणनीति को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेना समझदारी है। आने वाले समय में गोल्ड की कीमतें बढ़ भी सकती हैं और उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकते हैं, इसलिए प्लानिंग के साथ निवेश करना जरूरी है।