PMO का नया नाम ‘सेवा तीर्थ’, देशभर के राजभवन अब कहलाएंगे ‘लोक भवन’

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PMO का नया नाम ‘सेवा तीर्थ

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सरकारी संस्थानों के नामकरण में बेहद अहम बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। इसके साथ ही देशभर के सभी राजभवन अब ‘लोक भवन’ के नाम से जाने जाएंगे, जबकि मंत्रालयों के लिए बनाए जा रहे नए केंद्रीय सचिवालय को ‘कर्तव्य भवन’ नाम दिया गया है।

सरकार का मानना है कि यह बदलाव प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परिवर्तन है, जिसका मकसद ‘सत्ता’ नहीं, ‘सेवा’ की भावना को प्रमुखता देना है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया “भारत में सार्वजनिक संस्थानों की पहचान बदल रही है। यह परिवर्तन शासन की सोच को दर्शाता है, जहां हम सत्ता से सेवा की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

पहले भी बदले गए कई ऐतिहासिक नाम

इससे पहले केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण स्थानों के नाम बदले थे दिल्ली के राजपथ का नाम 2022 में कर्तव्य पथ किया गया। प्रधानमंत्री के सरकारी आवास को रेस कोर्स रोड से बदलकर लोक कल्याण मार्ग (2016) किया गया। सरकार का कहना है कि पुराने नाम उपनिवेशवादी मानसिकता से जुड़े थे, जिन्हें बदलकर भारतीय मूल्यों के अनुरूप किया गया है।

राजभवन क्यों बना ‘लोक भवन’?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह प्रस्ताव पिछले वर्ष राज्यपाल सम्मेलन में रखी गई चर्चा के आधार पर आगे बढ़ाया। मंत्रालय के अनुसार, ‘राजभवन’ शब्द औपनिवेशिक शासन की याद दिलाता है और लोकतंत्र की भावना का प्रतिनिधित्व नहीं करता। इसलिए अब राज्यपाल और उप-राज्यपाल के आधिकारिक कार्यालयों और आवासों को क्रमशः लोक भवन और लोक निवास के नाम से जाना जाएगा।

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PMO अब नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दफ्तर अब 78 साल पुराने साउथ ब्लॉक से स्थानांतरित होकर ‘सेवा तीर्थ’ के नए उच्च तकनीकी परिसर में शिफ्ट हो रहा है। यह बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक बड़ा हिस्सा है। 14 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सेवा तीर्थ 2 ब्लॉक में तीनों सेना प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक भी की थी, जो संकेत देता है कि यह परिसर संचालन के लिए लगभग तैयार है।

सेवा तीर्थ में क्या होगा?

सेवा तीर्थ प्रोजेक्ट तीन हिस्सों में विभाजित है—

  • सेवा तीर्थ 1 : प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
  • सेवा तीर्थ 2 : कैबिनेट सचिवालय
  • सेवा तीर्थ 3 : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का दफ्तर

क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट?

सेंट्रल विस्टा परियोजना में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के पूरे क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। इसके तहत नया संसद भवन प्रधानमंत्री और उप-राष्ट्रपति आवास सभी मंत्रालयों के लिए विशाल कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (कर्तव्य भवन) , आधुनिक प्रशासनिक भवन, कर्तव्य पथ का पुनर्विकास करेगा। यह प्रोजेक्ट सितंबर 2019 में घोषित हुआ और 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी आधारशिला रखी। इसके लिए सरकार ने लगभग 20 हजार करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं।

कर्तव्य पथ के दोनों ओर प्रशासनिक बदलाव

सरकार का उद्देश्य है कि कर्तव्य पथ के 3 किमी क्षेत्र को एक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और पैदल चलने योग्य सरकारी जोन में बदल दिया जाए। ‘कर्तव्य भवन’ के रूप में बने कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट में 10 नए ऑफिस ब्लॉक तैयार किए गए हैं, जहां वे मंत्रालय शिफ्ट होंगे जो अभी शास्त्री भवन, कृषि भवन और निर्माण भवन जैसी पुरानी इमारतों में फैले हुए हैं। एक ब्लॉक में काम शुरू हो चुका है जबकि तीन और ब्लॉक लगभग तैयार हैं।

नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक बनेगा ‘युग-युगीन भारत संग्रहालय’

सेंट्रल विस्टा प्लान के तहत ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को भविष्य में ‘युग-युगीन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए फ्रांस की एक प्रतिष्ठित म्यूज़ियम डेवलपमेंट एजेंसी को नियुक्त किया गया है।

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