Diwali के बाद गैस चेंबर बना Delhi-NCR: AQI ‘बेहद खराब’ श्रेणी में, हवा में जहर घुला — जानें क्या करें और क्या नहीं

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Delhi-NCR turns into a gas chamber after Diwali

दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। बीती रात शहर में पटाखों की गूंज देर रात तक सुनाई दी, जिसके बाद मंगलवार सुबह आसमान धुंध से ढका नजर आया। दृश्यता काफी कम हो गई और वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ स्तर पर पहुंच गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण ब्यूरो (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह आठ बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 352 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। सुबह पांच बजे यह 346, छह बजे 347 और सात बजे 351 था।

पटाखों ने बढ़ाई प्रदूषण की मार

उच्चतम न्यायालय ने इस बार दिल्ली-एनसीआर में केवल रात 8 बजे से 10 बजे के बीच हरित पटाखे (Green Crackers) फोड़ने की अनुमति दी थी। बावजूद इसके, कई इलाकों में रात भर आतिशबाजी होती रही। इसके चलते सोमवार की रात से ही प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया।

CPCB के प्रति घंटे के आंकड़ों के अनुसार, रात 12 बजे दिल्ली का AQI 349 और एक बजे 348 था। राजधानी के 38 निगरानी केंद्रों में से 36 में प्रदूषण का स्तर ‘रेड जोन’ में रिकॉर्ड किया गया। सोमवार का औसत AQI 345 रहा, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मंगलवार और बुधवार को वायु गुणवत्ता और भी ज्यादा गिर सकती है तथा स्थिति ‘गंभीर’ स्तर तक पहुंच सकती है।

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Delhi AQI Level: कितना होना चाहिए सामान्य AQI

AQI यानी Air Quality Index हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर को मापने का पैमाना है।

यह 0 से 500 तक के स्केल पर होता है —

0–50अच्छा (Good)
51–100संतोषजनक (Satisfactory)
101–200मध्यम (Moderate)
201–300खराब (Poor)
301–400बेहद खराब (Very Poor)
401–500गंभीर (Severe)

वर्तमान में दिल्ली का AQI लगातार 350 से ऊपर बना हुआ है, यानी हवा में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो चुका है।

प्रदूषण से होने वाली बड़ी बीमारियां

लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेना शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। यह केवल सांस की नहीं बल्कि पूरे शरीर की कई बीमारियों को जन्म देता है।

सांस संबंधी बीमारियां:

  • अस्थमा और सांस फूलना
  • ब्रोंकाइटिस (श्वसन नली की सूजन)
  • COPD (फेफड़ों की दीर्घकालिक बीमारी)

अन्य स्वास्थ्य समस्याएं:

  • फेफड़ों का कैंसर
  • दिल की बीमारियां, हार्ट अटैक या स्ट्रोक
  • त्वचा की समस्याएं — चकत्ते, खुजली
  • तंत्रिका तंत्र की बीमारियां — अल्जाइमर, पार्किंसन
  • पाचन संबंधी परेशानी — पेट दर्द, गैस, कब्ज
  • कमजोर इम्यून सिस्टम — फ्लू, खांसी, बार-बार संक्रमण

क्या करें, क्या न करें: प्रदूषण से बचाव के उपाय

क्या करें:

  • N95 मास्क पहनें: बाहर निकलते वक्त मास्क जरूर लगाएं ताकि हानिकारक कण फेफड़ों में न पहुंचें।
  • घर के अंदर रहें: हवा खराब होने पर बाहर की गतिविधियां कम करें।
  • एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें: घर में हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर लगाएं।
  • बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें: इनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, इसलिए इन्हें प्रदूषण से बचाना जरूरी है।
  • AQI ऐप्स चेक करें: SAFAR या AQI India ऐप से हवा की गुणवत्ता की जानकारी लेते रहें।
  • योग और एक्सरसाइज घर पर करें: खुले में एक्सरसाइज करने से बचें।

क्या न करें:

  • सुबह या देर शाम बाहर न टहलें — इन समयों में हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित होती है।
  • खुली खिड़कियों से हवा आने न दें जब AQI स्तर खराब हो।
  • सिगरेट या धूपबत्ती का उपयोग घर के अंदर न करें।

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