मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत के बाद अब केंद्र सरकार ने देशभर में दवा निर्माताओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार ने सभी राज्यों से कफ सिरप बनाने वाली दवा कंपनियों की विस्तृत सूची मांगी है ताकि निगरानी प्रणाली को और सशक्त किया जा सके। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए तीन दवा कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और आने वाले दिनों में सख्त नियम लागू करने की तैयारी चल रही है।
केंद्र ने मांगी सभी राज्यों से रिपोर्ट
CDSCO के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र ने सभी राज्यों को पत्र भेजकर अपने-अपने इलाकों में कफ सिरप बनाने वाली दवा कंपनियों की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराने को कहा है। अधिकारी ने कहा,
“कंपनियों की पहचान होने के बाद उनका संयुक्त ऑडिट किया जाएगा, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की टीम शामिल होंगी। यह प्रक्रिया अगले एक महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य है।”
इस ऑडिट में कंपनियों की उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता और लैब टेस्टिंग मानकों की गहराई से जांच की जाएगी।
दवा कंपनियों पर बढ़ेगी जवाबदेही
भारत में दवाओं की निगरानी की जिम्मेदारी राज्यों की होती है। हर राज्य का ड्रग कंट्रोल विभाग स्थानीय स्तर पर दवा निर्माण इकाइयों और बाजार में बिक रही दवाओं पर निगरानी रखता है। हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अगर किसी दवा के उत्पादन या जांच में खामी पाई जाती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित दवा कंपनी की होती है। राज्य सरकारें हर बैच की जांच नहीं करतीं, लेकिन अब केंद्र सरकार इस प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
हानिकारक रसायन पर लगेगा अंकुश
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार अब कफ सिरप में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक कैमिकल डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) पर सख्त नियंत्रण के लिए नया नियम बनाने जा रही है। इन रसायनों के सेवन से बच्चों की किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ चुकी हैं। सूत्रों ने बताया कि अगले 10 दिनों में सख्त कदमों का असर दिखने लगेगा और एक महीने के भीतर सभी संदिग्ध सिरप की जांच पूरी कर ली जाएगी।
तीन कंपनियों के लाइसेंस रद्द
CDSCO की रिपोर्ट के अनुसार, तीन सिरप के सैंपल संदिग्ध पाए गए हैं जिनमें भारी मात्रा में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मौजूदगी पाई गई।
इन सिरप की पहचान इस प्रकार है —
- रेस्पिफ्रेश टीआर (Rednex Pharmaceuticals, गुजरात)
- कोल्ड्रिफ (Srisun Pharma, तमिलनाडु)
- रीलाइफ (Shape Pharma, गुजरात)
इन तीनों कंपनियों के निर्माण लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन उत्पादों का निर्यात तो नहीं हुआ, लेकिन घरेलू बाजार में कई राज्यों में इनकी बिक्री हो रही थी। अब सभी राज्यों में इन दवाओं को बाजार से वापस मंगाया जा रहा है।
केंद्र सख्त सजा का नियम बनाएगा
सरकार जल्द ही एक नया नियम लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान किया जाएगा, जो दवा निर्माण में लापरवाही बरतेंगी या गुणवत्ता से समझौता करेंगी। अधिकारी ने कहा कि अगर कच्चे माल और तैयार उत्पाद की समय पर जांच की जाती, तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
सरकार की मंशा स्पष्ट
केंद्र का मकसद है कि भारत से बनने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर कोई सवाल न उठे और देश की “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” की छवि बरकरार रहे। स्वास्थ्य मंत्रालय आने वाले हफ्तों में राष्ट्रीय औषधि सुरक्षा नीति में संशोधन कर नए मानक लागू करने पर विचार कर रहा है।