दिल्ली के मशहूर कोचिंग संस्थान दृष्टि IAS अब सुर्खियों में है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने संस्थान पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2022 के नतीजों को लेकर दृष्टि IAS ने भ्रामक विज्ञापन जारी किया। संस्थान ने दावा किया था कि उसने 216 से अधिक उम्मीदवारों का चयन कराया, जबकि जांच में यह दावा झूठा साबित हुआ।
जांच में सामने आया सच
CCPA की जांच में पाया गया कि 216 में से 162 छात्र केवल प्रीलिम्स और मेन्स पास करने के बाद दृष्टि IAS के फ्री इंटरव्यू प्रैक्टिस प्रोग्राम में शामिल हुए। यानी अधिकांश छात्रों की सफलता में कोचिंग की भूमिका सीमित थी। वास्तविकता में केवल 54 छात्रों ने दृष्टि IAS के IGP और अन्य कोर्स जॉइन किए।
PIB की रिपोर्ट के अनुसार, दृष्टि IAS ने इस जानकारी को छुपाया और प्रचार किया कि सभी 216 छात्रों की सफलता का श्रेय केवल संस्थान को जाता है। यह भ्रामक विज्ञापन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2 (28) के तहत आता है।
पहले भी जुर्माना लगा चुका है संस्थान
यह पहला मामला नहीं है। सितंबर 2024 में दृष्टि IAS पर पहले भी जुर्माना लगाया गया था। उस समय संस्थान ने UPSC CSE 2021 के लिए दावा किया था कि 150 से अधिक छात्रों का चयन उसके छात्रों ने कराया। जांच में सामने आया कि 161 उम्मीदवारों में से 148 IGP, 7 मेन्स मेंटरशिप, 4 GS फाउंडेशन, और 1 वैकल्पिक कोर्स में शामिल थे। उस पर 3 लाख रुपये का जुर्माना और झूठे विज्ञापन रोकने का आदेश जारी किया गया।
CCPA की चेतावनी और अन्य संस्थानों की जांच
CCPA ने कहा कि चेतावनी के बावजूद दृष्टि IAS ने 2022 में वही गलती दोहराई। अब तक 54 कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापन के लिए नोटिस भेजा जा चुका है। इनमें से 26 संस्थानों पर कुल 90.6 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है।
इस फैसले से साफ है कि CCPA अब कोचिंग संस्थानों के भ्रामक प्रचार पर कड़ा रुख अपना रहा है, और छात्रों को सही जानकारी देने के लिए संस्थानों को जवाबदेह बनाना चाहता है।