पटना।
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी न हुआ हो, लेकिन चुनावी हलचल अब तेज़ होने लगी है। राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इस बार राज्य की राजनीति में एनडीए और महागठबंधन आमने-सामने होंगे। वहीं, बीजेपी के लिए यह चुनाव विशेष महत्व रखता है। शायद यही वजह है कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार बिहार को बड़े-बड़े तोहफ़े दे रहे हैं। इन्हीं ऐलानों में सबसे अहम है—राज्य में 19 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने का निर्णय।
चुनाव से पहले बड़ा ऐलान
केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में बिहार के 16 जिलों में 19 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इन विद्यालयों के खुलने से करीब 30 हज़ार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा। साथ ही, यहां 1,500 से अधिक शिक्षकों की भर्ती भी होगी।
इन नए विद्यालयों के लिए जिन जिलों को चुना गया है, उनमें शामिल हैं—पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, शेखपुरा, कैमूर, अरवल, भोजपुर, नालंदा, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर, मधेपुरा, कटिहार और सीतामढ़ी। इनमें पटना, मधुबनी और शेखपुरा में दो-दो विद्यालयों को मंजूरी मिली है।
हर जिले तक केंद्रीय विद्यालय
इस फैसले के बाद बिहार के हर जिले में केंद्रीय विद्यालय की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। अब तक कई जिले इस सुविधा से वंचित थे। दिलचस्प पहलू यह भी है कि केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कुछ दिन पहले ही बिहार चुनाव का प्रभारी बनाया गया था। उनके जिम्मेदारी संभालने के तुरंत बाद यह घोषणा होना बीजेपी की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक समीकरणों पर असर
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह घोषणा चुनाव में एनडीए को सीधा फायदा पहुंचा सकती है। दरअसल, इन 16 जिलों में 9 ऐसे हैं जहां पिछली बार एनडीए ने महागठबंधन से ज़्यादा सीटें जीती थीं। 4 जिलों में महागठबंधन को बढ़त मिली थी, जबकि 3 जिलों में मुकाबला बराबरी का रहा था। कुल मिलाकर इन जिलों में विधानसभा की 110 सीटें आती हैं, जिनमें से 65 सीटें इस समय एनडीए के पास हैं। ऐसे में शिक्षा को लेकर किया गया यह ऐलान इन इलाकों में सत्ता पक्ष के लिए वोट बटोरने का हथियार बन सकता है।
स्थानीय सांसदों की भूमिका
नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। मधेपुरा से सांसद दिनेश चंद्र यादव ने अपने क्षेत्र में विद्यालय की मांग उठाई थी। वहीं, बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कैमूर के भभुआ में केंद्रीय विद्यालय की मांग की थी। दोनों नेताओं ने इस घोषणा के बाद प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया है।
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने इसे बिहार के सर्वांगीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक फैसला बताया। उनका कहना है कि यह कदम आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा देगा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे शिक्षा सुधार मिशन को और मजबूती मिलेगी।
चुनावी साल में घोषणाओं की बौछार
गौरतलब है कि बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार भी लगातार बड़े ऐलान कर रही है। युवा बोर्ड का गठन, महिला रोजगार योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी और गरीबों के लिए मुफ्त बिजली जैसे कई फैसले हाल ही में घोषित किए गए हैं। अब केंद्र सरकार भी इन ऐलानों की कड़ी में अपनी चुनावी सक्रियता दिखा रही है।
निष्कर्ष
बिहार में शिक्षा हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। नई पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखकर लिए गए इस फैसले से एनडीए को ज़मीन पर कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा, यह तो चुनावी नतीजे ही बताएंगे। लेकिन इतना तय है कि 19 नए केंद्रीय विद्यालयों का ऐलान चुनावी माहौल को गरमाने और मतदाताओं को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।