धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान: “भूतों पर करूंगा पीएचडी, हमें गजवा-ए-हिंद नहीं, भगवा-ए-हिंद चाहिए”

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धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान: "भूतों पर करूंगा पीएचडी, हमें गजवा-ए-हिंद नहीं, भगवा-ए-हिंद चाहिए"

नई दिल्ली। बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर और चर्चित कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने एक प्रमुख न्यूज़ चैनल को दिए गए साक्षात्कार में न सिर्फ अपनी भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की, बल्कि हिंदू राष्ट्र, भूत-प्रेत पर शोध और निजी जीवन से जुड़े सवालों पर भी बेबाकी से जवाब दिए।

“भूतों पर पीएचडी करूंगा” — धीरेंद्र शास्त्री

इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पढ़ाई और आगे की योजनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दिया। शास्त्री ने कहा:

मैं भूतों पर पीएचडी करना चाहता हूं। लोग मज़ाक उड़ाते हैं कि भूतों पर पीएचडी कौन करता है, लेकिन बहुत लोगों ने की है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी इस विषय पर रिसर्च होती है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे देश में, जहां अध्यात्म, परालौकिक और तांत्रिक परंपराओं का गहरा इतिहास रहा है, वहां इस विषय पर अकादमिक शोध की ज़रूरत है।

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शादी पर हल्का-फुल्का जवाब

जब शास्त्री से उनके विवाह को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:

अब तक किसी लड़की को पसंद नहीं किया है। अगली बार आपको सीधा शादी का कार्ड देंगे।”

उनका यह जवाब सुनकर इंटरव्यू का माहौल हल्का-फुल्का हो गया। हालांकि, उनके अनुयायियों और समर्थकों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है।

हमें गजवा-ए-हिंद नहीं, भगवा-ए-हिंद चाहिए”

हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने साफ कहा:

हमें फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कहता है। हम गलत नहीं हैं, इसलिए डर नहीं है। हम गजवा-ए-हिंद नहीं चाहते, भगवा-ए-हिंद चाहते हैं।”

उन्होंने आगे जोड़ा कि जब तक वे जीवित हैं, वे हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रयास करते रहेंगे। उनका यह बयान राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई बहस को जन्म दे रहा है।

समकालीन मुद्दों पर खुलकर राय

साक्षात्कार के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने सामाजिक और धार्मिक बहसों पर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि भारत को अपनी आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यात्म और परंपरा को लेकर उठने वाले सवालों से डरने के बजाय शोध और चर्चा को प्रोत्साहित करना चाहिए।

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