इंदौर। इन दिनों हर तरफ इंदौर में दूषित पानी कांड की गूंज है। राज्य सरकार द्वारा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और नगर निगम कमिश्नर के तबादले के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चरम पर है।
इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती अभी भी राजनीति की रणभूमि बनी हुई है। दहशत का आलम यह है कि दूषित पानी से डरे भागीरथपुरा के रहवासियों में विश्वास पैदा करने के लिए अफसर अब बस्तियों में जाकर उनके सामने पानी पीकर दिखा रहे हैं। लोगों को यह सब ड्रामेबाजी लग रहा है। उनका कहना है कि जब हम लोगों ने बस्ती में दूषित पानी की सप्लाई की शिकायत की तो किसी ने नोटिस नहीं लिया। लोग अस्पताल में मरते रहे और निगम अमला चैन की नीं सोता रहा। अब कलेक्टर बस्ती में आकर उस पानी को पीकर दिखा रहे हैं जो दूषित नहीं है। पीड़ित जनता के साथ यह मजाक है। कुल मिलाकर यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि दूषित पानी कांड से उपजे हालात ने कलेक्टर को भी पानी पिला दिया।
कलेक्टर अफसरों की टीम के साथ बस्ती में पहुंचे। पानी बांट रहे टैंकरों का पानी पीया और उसकी क्वालिटी देखी। रहवासियों ने उनके सामने शिकायतों की झड़ी लगा दी। किसी ने कहा खाली प्लांटों पर कचरा साफ नहीं होता तो किसी ने संकरी गलियों में पानी के टैंकर नहीं आने की परेशानी बताई। कलेक्टर ने निगम अफसरों से कहा कि वे टैंकरोंमें बड़े पाइप लगाकर पानी संकरी गलियों पक पहुंचाएं।
भागीरथपुरा में जिस दूषित पानी से लोग बीमार हुए हैं, एमजीएम मेडिकल कालेज में हुई जांच में ई- कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया मिले हैं। अब बैक्टीरिया की विस्तृत जांच के लिए कलकता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलाॅजी से वैज्ञानिकों की टीम इंदौर आएगी। वह भागीरथपुरा से पानी का सैंपल लेगी और बैक्टीरिया की विस्तृत जांच करेगी।