ग्वालियर-चंबल अंचल में हथियारों का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां करीब 1 लाख 40 हजार लाइसेंसी हथियार मौजूद हैं, जो मध्य प्रदेश के कुल लाइसेंसधारी हथियारों का लगभग 40 फीसदी हिस्सा है। लेकिन इन हथियारों से आत्मरक्षा से ज्यादा अपराध बढ़ने लगे हैं। हत्या, आत्महत्या, हर्ष फायरिंग और धमकाने के लिए हवाई फायर जैसे मामलों में बढ़ोतरी के बाद अब पुलिस के साथ हाईकोर्ट भी सख्त हो गया है।
हाईकोर्ट का आदेश
ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि जिन परिवारों के पास पहले से 2 लाइसेंसी हथियार हैं, उन्हें तीसरे हथियार का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। कोर्ट का यह फैसला हथियारों की होड़ और अपराधों पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अपराधों में हथियारों का इस्तेमाल
पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि पिछले एक साल में लाइसेंसी हथियारों से 7 हत्याएं और 13 आत्महत्याएं हुईं। वहीं, हर्ष फायरिंग और धमकाने के लिए करीब 70 मामले दर्ज किए गए। आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के 200 से ज्यादा हथियार लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इसके अलावा, जिन लोगों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, उनके लाइसेंस निरस्त करने के लिए भी प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
लोगों की राय
स्थानीय लोग भी मानते हैं कि ग्वालियर-चंबल में लाइसेंसी हथियारों की अधिकता से लोगों का स्वभाव उग्र होता जा रहा है। मामूली विवादों पर भी लोग फायरिंग कर देते हैं। युवाओं का कहना है कि हथियारों की होड़ पर लगाम जरूरी है, ताकि क्षेत्र में भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण बन सके।
हथियारों का क्रेज
ग्वालियर-चंबल संभाग के 8 जिलों में हथियारों की संख्या सबसे अधिक है। यहां लोग घर बेचकर या गिरवी रखकर भी हथियार खरीद लेते हैं। शादी समारोह, बर्थडे पार्टी या फिर सोशल मीडिया और सड़कों पर रौब झाड़ने के लिए इन हथियारों का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है। हालांकि हाईकोर्ट का आदेश और पुलिस की सख्ती इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की उम्मीद जगा रही है।