सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाते हैं तो वे जनरल कैटेगरी की सीटों पर भी सरकारी नौकरी पाने के योग्य होंगे। भारत में सरकारी नौकरियों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में नामांकन में इस फैसले का दूरगामी असर होने वाला है।
रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों की बड़ी जीत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आरक्षण की श्रेणी में आने वाले मेधावी उम्मीदवारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। इस फैसले के साथ ही सरकारी नौकरियों में सामान्य श्रेणी की सीटों का मतलब भी नए सिरे से परिभाषित हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से दायर मामले में सुनाया है, जिसमें एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में यह नियम निर्धारित किया गया था कि रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी की सीटों पर नियुक्त नहीं किया जाएगा, चाहे इनके अंक जनरल कट-ऑफ से अधिक क्यों न हों।
योग्यता को उसका उचित महत्व देना होगा
राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से दलील दी गई थी कि अगर एससी, एसटी, ओबीसी और आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों को जनरल सीट भी लेने दिया जाएगा, तो इससे उन्हें दोहरा फायदा मिल जाएगा, जिसमें एक आरक्षण के माध्यम से होगा और दूसरा सामान्य श्रेणी के माध्यम से। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को ठुकरा दिया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन और उसके रजिस्ट्रार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि योग्यता को उसका उचित महत्व देना होगा।
ओपन कैटेगरी की सीट सभी के लिए
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में इंदिरा साहनी केस पर ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया। जस्टिस दत्ता ने कहा, हम मानते हैं कि ओपन शब्द का सीधा अर्थ है ओपन। ओपन कैटेगरी की सीट किसी भी खास जाति या समूह के लिए आरक्षित नहीं है। यह सभी के लिए है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सिर्फ आरक्षण की उपलब्धता की वजह से एससी, एसटी, ओबीसी या ईडब्ल्यूएस श्रेणी के किसी योग्य उम्मीदवार को शुद्ध मैरिट के आधार पर अनारक्षित सीट से चुने जाने से रोका नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस भी जारी की है।