ग्वालियर जिला अस्पताल में पार्किंग शुल्क को लेकर बवाल, मरीज के परिजनों और स्टाफ में जमकर मारपीट

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ग्वालियर जिला अस्पताल में पार्किंग शुल्क को लेकर बवाल, मरीज के परिजनों और स्टाफ में जमकर मारपीट

ग्वालियर। ग्वालियर के जिला अस्पताल मुरार में रविवार को उस समय हंगामा हो गया जब पार्किंग शुल्क को लेकर मरीज के परिजनों और पार्किंग स्टाफ के बीच विवाद खड़ा हो गया। मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते मारपीट का रूप ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को किसी तरह शांत कराया। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

गर्भवती महिला को दिखाने आए थे परिजन

जानकारी के अनुसार, नीतू सिंह नाम की गर्भवती महिला को उसके परिजन ऑटो से इलाज कराने जिला अस्पताल लाए थे। इलाज के बाद जब परिजन महिला को वापस ले जाने लगे, तभी पार्किंग शुल्क को लेकर विवाद शुरू हो गया।

परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही पार्किंग शुल्क जमा कर दिया था, लेकिन पार्किंग स्टाफ ने दोबारा पैसे की मांग की। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वहां मौजूद स्टाफ ने गाली-गलौज शुरू कर दी।

25 मिनट तक चलता रहा हंगामा

विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में करीब 25 मिनट तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। इस दौरान गर्भवती महिला के परिजन शैलेंद्र सिंह और धीरेंद्र सिंह ने पार्किंग स्टाफ आनंद राणा के साथ मारपीट कर दी। देखते ही देखते अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया और अन्य मरीजों व परिजनों में भी दहशत फैल गई।

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पुलिस की दखलअंदाजी से शांत हुआ मामला

सूचना मिलने पर मुरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर किसी तरह मामला शांत कराया। पार्किंग स्टाफ आनंद राणा की शिकायत पर पुलिस ने शैलेंद्र सिंह और धीरेंद्र सिंह के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौज का केस दर्ज कर लिया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के दौरान अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज निकाले जा रहे हैं। फुटेज के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि विवाद की शुरुआत किसने की और किसका आचरण आक्रामक रहा।

अस्पताल प्रबंधन पर सवाल

यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर जिला अस्पताल में पार्किंग शुल्क को लेकर विवाद हुआ हो। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि पार्किंग व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित है और आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं।

अस्पताल परिसर में बार-बार इस तरह की घटनाएं न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों के लिए अतिरिक्त परेशानी का सबब भी बनती हैं।

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