अगर आप भी रेपो रेट में कटौती के बाद अपनी EMI कम होने का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों को साफ निर्देश दिया है कि रेपो रेट घटने का पूरा फायदा ग्राहकों को तुरंत दिया जाए। मंगलवार को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पब्लिक सेक्टर और बड़े प्राइवेट बैंकों के MD-CEO को तलब कर सख्त लहजे में कहा “जितनी बार हमने रेपो रेट कम किया है, उसका पूरा लाभ तुरंत ग्राहकों तक पहुंचाओ। यह पैसा जनता का है, देरी मत करो”
अब तक ग्राहकों को क्यों नहीं मिला फायदा?
RBI की ओर से फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में 1.25% यानी 125 बेसिस पॉइंट की भारी कटौती की जा चुकी है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट घटाकर 5.25% किया है, जबकि देश की GDP ग्रोथ भी 8% से पार चल रही है। इसके बावजूद अधिकांश बैंक पुरानी और ऊंची ब्याज दर ही वसूल रहे हैं, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों की जेब पर बोझ कम नहीं हुआ है। इसी देरी पर RBI ने नाराजगी जताई।
RBI की चेतावनी
बैठक में गवर्नर ने कहा कि साल 2025 में बैंकों की वित्तीय स्थिति सुधरी है, NPAs घटे हैं। लेकिन उन्होंने कहा “लापरवाही मत करो। तकनीक बढ़ रही है, तो बैंकिंग सस्ती होनी चाहिए।”
उन्होंने बैंकों से ये 5 बड़े निर्देश दिए:
1. EMI तुरंत घटाएं और रेपो रेट कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को दें।
2. कस्टमर सर्विस में सुधार करें और शिकायतों का जल्दी निपटान करें।
3. डिजिटल फ्रॉड से सावधान रहें और इंटेलिजेंस-बेस्ड सिक्योरिटी बढ़ाएं।
4. री-केवाईसी और अनक्लेम्ड अमाउंट रिटर्न की प्रक्रिया तेज करें।
5. छोटे व्यवसायों और आम ग्राहकों के लिए बैंकिंग और सस्ती बनाएं।
जनवरी तक हो सकती है बड़ी राहत
यह मीटिंग RBI की नियमित समीक्षा का हिस्सा है, इससे पहले 27 जनवरी 2025 को भी बैठक हुई थी। लगातार निगरानी के बीच अब बैंकों पर दबाव बढ़ गया है। अगर वे जल्द ब्याज दरें कम नहीं करते तो RBI और सख्त कदम उठा सकता है।
ग्राहकों के लिए बड़ा संकेत
RBI के सख्त रुख के बाद अब बैंकों पर ब्याज दरें घटाने का सीधा दबाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बैंक तुरंत कदम उठाते हैं, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में जनवरी तक उल्लेखनीय कटौती देखने को मिल सकती है। यह उन करोड़ों ग्राहकों के लिए बड़ी राहत होगी जो लंबे समय से EMI कम होने का इंतजार कर रहे थे। अगर बैंक फिर भी देरी करते हैं, तो RBI ने संकेत दे दिया है कि वह कड़े नियामकीय कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यानी आने वाले हफ्तों में फैसला बैंकों को ही करना है या तो तुरंत ब्याज दरें घटाएं, या फिर सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।