घोटालों की कड़ी में एक और घोटाला जुड़ गया जिसका असर इस बार भारतीय रेलवे के सेवा निवृत्त होने वाले ऑफिसर व कर्मचारियों पर पड़ रहा है रेल्वे में चांदी का सिक्का देने की 20 वर्ष पुरानी परंपरा थी जिसे रेलवे बोर्ड द्वारा बुधवार को जारी किए गए आदेश द्वारा बंद कर दिया गया।
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मुख्य कारण
पश्चिम मध्य रेलवे ने सेवा नियत कर्मचारियों को सम्मान पूर्वक चांदी के सिक्के दिए जो कथित रूप से नकली निकले, सिक्को में 0.23 प्रतिशत चांदी की मात्रा पाई गई बाकी तांबा था जिससे रिटायर्ड कर्मचारी रेलवे से नाराज होकर कर्मचारी स्वयं को ठगा व अपमानित महसूस कर रहे हैं। यह सभी सिक्के रेलवे ने इंदौर की कंपनी “मेसर्स वायबल डायमंड” से गोल्ड प्लेटेड सिल्वर सिक्के खरीदे थे