भारत यात्रा पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के दोहरे व्यवहार पर तीखा हमला बोला है। एक इंटरव्यू में पुतिन ने पूछा कि जब अमेरिका रूस से न्यूक्लियर फ्यूल खरीद सकता है, तो भारत के रूस से तेल खरीदने पर सवाल उठाने का अधिकार उसे किसने दिया? पुतिन गुरुवार शाम दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल हटाकर उनका स्वागत किया।
पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के संबंध सोवियत दौर से ही मजबूत रहे हैं। रूस भारत का दशकों से सबसे बड़ा रक्षा साझेदार रहा है। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। इससे भारत विश्व के सबसे बड़े रूसी तेल खरीदारों में शामिल हो गया।
इसी दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर दंडात्मक शुल्क लगाने के साथ-साथ रूस से तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि भारत द्वारा सस्ते रूसी तेल की खरीद से यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष आर्थिक मदद मिलती है। पुतिन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अमेरिकी दोहरे मापदंड का उदाहरण है।
इंटरव्यू में पुतिन ने स्पष्ट कहा, अमेरिका आज भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए रूस से परमाणु ईंधन खरीद रहा है। ईंधन तो ईंधन है, तो फिर भारत को वही अधिकार क्यों नहीं?
भारत लंबे समय से कहता आ रहा है कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ अनुचित और पक्षपाती हैं। भारत यह भी इंगित कर चुका है कि अमेरिका खुद रूस से बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), एनरिच्ड यूरेनियम और अन्य रूसी ऊर्जा उत्पादों का अरबों डॉलर का आयात कर रहे हैं इस स्थिति में भारत की आलोचना करना तर्कहीन है। पुतिन के इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा राजनीति में दोहरे मानदंडों की बहस को हवा दे दी है।